मऊ। अब गांवों में किराया पर चलने वाले होमियोपैथिक, आयुर्वेदिक चिकित्सालयों में तैनात चिकित्सकों तथा कर्मचारियों को समीप के प्राथमिक तथा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में तैनात किया जाएगा।
जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में चल रहे आयुर्वेदिक तथा होमियोपैथिक चिकित्सालय संसाधन विहीन हैं। होमियोपैथिक, आयुर्वेदिक अस्पताल किराया और पंचायत भवन में संचालित हो रहे हैं। शासन की तरफ से इन अस्पतालों में तैनात चिकित्सकों तथा कर्मचारियों को नजदीक प्राथमिक तथा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में तैनात किया जाएगा। किराया पर चल रहे आयुर्वेद के सात, यूनानी का एक तथा आठ होमियोपैथिक चिकित्सालय शामिल हैं। शासन की तरफ से प्राथमिक तथा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए बदहाल आयुर्वेदिक, यूनानी तथा होमियोपैथिक के अस्पतालों को बंद कर चिकित्सकों तथा स्वास्थ्यकर्मियों को ज्वाइनिंग कराने का आदेश जारी कर दिया गया था, लेकिन अभी तक गांवों के अस्पतालों में नियुक्त
चिकित्सकों तथा स्वास्थ्य कर्मियों को स्वास्थ्य केंद्रों पर तैनाती नहीं की जा सकी है। विभागीय प्रक्रिया चल रही है। दवाओं की उपलब्धता के स्पष्ट गाइड लाइन न होने से उहापोह की स्थिति बनी हुई है। ऐसे में प्राथमिक तथा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में मानक के अनुरुप मरीजों को स्वास्थ्य सेवाएं नहीं मिल पा रही है। इस संबंध में क्षेत्रीय आयुर्वेदिक व यूनानी अधिकारी शमसुद्दीन अंसारी का कहना है कि चिकित्सकों तथा स्वास्थ्यकर्मियों की तैनाती की प्रक्रिया चल रही है। इस बाबत मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. सतीश चंद्र सिंह का कहना है कि प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। जिला होमियोपैथिक अधिकारी तथा क्षेत्रीय आयुर्वेदिक व यूनानी अधिकारी को पत्र जारी कर दिया गया है।