प्रदेश के तत्कालीन मुुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी ने 19 नवंबर 1988 को मऊ को जनपद बनाने की घोषणा स्वयं यहां आकर की थी। कांग्रेस के कद्दवार नेता कल्पनाथ राय के प्रयास से इंदिरा गांधी की जयंती पर लोगों को नये जनपद की सौगात मिली थी।
नारायण दत्त तिवारी लखनऊ से कल्पनाथ के साथ हेलीकाप्टर से मऊ पहुंचे थे। जीवनराम हास्टल के मैदान पर बने मंच से नाराण दत्त तिवारी ने मऊ को नया जिला बनाने की घोषणा की थी। कहा था कि आजमगढ जिले से अलग किए गए आठ ब्लाकों और बलिया जिले से एक ब्लाक रतनपुरा को मिलाकर नौ ब्लाकों का यह मऊ जिला होगा। जनपद के लिए पहले जिलाधिकारी जेएन चैंबर को भी मंच पर बुलाया और जिले के पहले जिलाधिकारी के रूप में उनका परिचय कराया था। समारोह को संबोधित करते हुए कहा था कि मऊ को विकास और योजनाओं के लिए अलग बजट मिलेगा। जनता को अधिकारियों से मिलने दूर नहीं जाना होगा। अधिकारियों के यहां पर बैठने से प्रशासनिक कार्यों में तेजी आएगी।
बता दें कि कांग्रेस के कद्दावर नेता चंद्रजीत यादव मऊ को आजमगढ़ जिले से अलग किए जाने के पक्ष में नहीं थे, लेकिन कल्पनाथ राय ने मऊ को नया जिला बनाने के लिए पूरी ताकत लगा दी थी। उनके इस प्रयास को नारायण दत्त तिवारी का वरद हस्त मिला और जिला अस्तित्व में आ गया। जनपद सृजन के बाद जीवनराम हास्टल के ही कई कमरों को कलेक्ट्रेट का रूप दिया गया। जनपदवासियों को नारायण दत्त तिवारी से काफी लगाव है। उनके निधन की सूचना मिलते ही लोगों में शोक छा गया और लोगों के जेहन में 19 नवंबर 1988 की वह तस्वीर उभर आई जिसने इस क्षेत्र के लोगों को मऊ जिले की सौगात दी थी।