मऊ। सपा शासन में स्वीकृत दो सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों का निर्माण निर्माणदायी संस्थाओं की लापरवाही के चलते नियत समय पर पूरा नहीं हो सका है। इनमें मझवारा स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के निर्माण के लिए दो किश्तों में पूरी रकम पांच करोड़ पांच लाख सात हजार रुपये पहले ही दी जा चुकी है। जबकि िनेमडांड़ स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के लिए केवल दो करोड़ 46 लाख 16 हजार रुपये की केवल एक किश्त ही दी गई है। इन दोनों अस्पतालों का निर्माण क्रमश: जून और सितंबर 2018 में ही पूरा हो जाना चाहिए था। हाल ही में हुई दिशा की बैठक में जनप्रतिनिधियों ने इस मुुद्दे को प्रमुखता से उठाया था। सांसद ने निर्माण दायी संस्थाओं के जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई करने के निर्देश जिलाधिकारी और सीएमओ को दिये थे।
घोसी ब्लाक के मझवारा बाजार में स्थित पीएचसी को सपा शासन काल में उच्चीकृत करके सीएचसी का दर्जा दिया गया था। इसके लिए पांच करोड़ पांच लाख सात हजार रुपये स्वीकृत किए गए थे। इसका निमार्ण मार्च 2017 में शुरु किया गया। निर्माण का जिम्मा उ.प्र. आवास एवं विकास परिषद को दिया गया। अस्पताल के लिए दो किश्तों में पूरी रकम शासन से दी जा चुकी है। निर्माण जून 2018 में पूरा किया जाना था। लेकिन अभी तक इसका आधा निर्माण भी नहीं हुआ है। उधर नेमडांड़ सीएचसी के लिए केवल एक ही किश्त 246.16 लाख रुपये दिए गए हैं। इसकी दूसरी किश्त दी ही नहीं गई। कार्यदायी संस्था यूपीपीसीएल ने इसका निर्माण मार्च 2015 में शुरु किया गया था। लेकिन साढ़े तीन सालों के बाद भी बजट के अभाव में इसका निर्माण अधर में है।
इन अस्पतालों का निर्माण अधूरा रह जाने के मुद्दे को दिशा की बैठक में ब्लाक प्रमुख संघ के जिलाध्यक्ष सुजीत कुमार सिंह ने प्रमुखता से उठाया। कहा कि सपा शासन काल में ही मझवारा के अस्पताल के निर्माण के पूरी रकम दी जा चुकी है फिर अधिकारियों की लापरवाही जारी है। इसी प्रकार पिछडे इलाके में स्थित नेमडांड़ सीएचसी के लिए वर्तमान सरकार ने दूसरी किश्त ही नहीं दी। सांसद हरिनारायण राजभर ने दिशा की बैठक में इस लापरवाही पर सीएमओ को फटकार लगाते हुए दोषी अधिकारी के विरुद्ध कार्रवाई करने के निर्देश दिए। इस बाबत सीएमओ डा. एससी सिंह का कहना है कि कार्यदायी संस्थाओं को पत्र लिखा गया है।
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दवा इलाज को भटकते हैं मरीज
मऊ। नेमडांड और मझवारा में अस्पताल निर्माण अधर में होने का परिणाम है कि क्षेत्र के लोगों को मरीजों का उपचार कराने के लिए इधर उधर भटकना पड़ता है। जबकि अस्पताल निर्माण कराने के लिए क्षेत्र पंचायत सदस्यों ने क्षेत्रीय जनता की समस्या से अवगत कराते हुए प्रशासन के सामने तथा बोर्ड की बैठक में इस समस्या को रख चुकें हैं।