कोपागंज। कस्बे के प्राचीन गौरी शंकर मंदिर परिसर में चल रहे संगीतमय साप्ताहिक भागवत कथा के अंतिम दिन सोमवार को कथावाचक अनुपानंद जी महाराज के कृष्ण सुदामा के प्रसंग सुन श्रद्धालु भाव विभोर हो गए। उत्साहित भक्त जय कन्हैया लाल की जयकारा लगाने से पूरा पंडाल भक्तिमय हो गया। कथा के अंतिम दिन भारी संख्या में शामिल श्रद्धालु राम-कृष्ण धुनों पर झूमते रहे।
आयोजकों की ओर से कार्यक्रम के समापन सत्र में फूलों की होली खेली गई। कथा वाचन के दौरान कथा में अनुपानंद महराज ने गुरु के महत्व को रेखांकित करते कथा की शुरुआत की। उन्होंने कहा कि मनुष्य अपनी इंद्रियों के कारण काम, क्रोध, आशक्ति, अहंकार से वशीभूत होकर जीवन के परम लक्ष्य और परम शांति से दूर होकर निराश और परेशान हो जाता है। भगवान कृष्ण की लीलाओं को साधारण भाव से नहीं समझा जा सकता है। मनुष्य जितना ज्यादा भगवान कृष्ण के भक्ति के प्रति अनुरागी होगा उतना ही उसका मन उज्ज्वल होता जाएगा। कहा कि भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा के मित्र प्रेम का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि सच्चे प्रेम में ऊंच और नीच नहीं होती और न ही अमीरी-गरीबी होती है। भगवान कृष्ण और सुदामा की दोस्ती को सच्चे मित्र प्रेम के प्रतीक के रूप में याद किया जाता है। सुदामा को अपने द्वार पर देखकर भगवान श्रीकृष्ण खड़े हो गए और स्वयं दौड़कर द्वार तक चले गए तथा अपने मित्र सुदामा को गले लगा लिया। कथा के दौरान अरे द्वारपालों कन्हैया से कह दो के दर पे सुदामा गरीब आ गया है। इस अवसर पर आयोजक समाजवादी पार्टी के पूर्व जिलाध्यक्ष शैलेंद्र यादव, ओम प्रकाश गुप्ता, पंकज राय, धर्मेंद्र चौरसिया, गोपाल यादव, संजीत यादव, प्रवीण चौरसिया, दीनबंधु गिरी, अशोक यादव आदि शामिल रहे।