कोपागंज के मोहल्ला फुलैलपुरा स्थित सदर इमामबाड़ा के सहन में 26 सफर सोमवार की आठ बजे कमेटी अबुतालिब फेडरेशन द्वारा शब्बेदारी का आयोजन किया गया। शब्बेदारी इमामे हुसैन की बहन जैनब की याद में मनाई गई।
शब्बेदारी से पूर्व हुई मजलिस को खिताब करते हुवे मौलाना सय्यद हैदर अब्बास लखनवी ने बताया कि हजरत इमाम हुसैन ने कर्बला के मैदान में अपने 72 जानिसारों के साथ शहादत देकर इस्लाम को बचाया है। उन्होंने नान के दीन को बचाने के लिए जालिम बादशाह यजीद के हाथों बैयत करने के बजाय शहीद होना मुनासिब समझा। कहा कि इमामे हुसैन की शहादत के बाद उनके घर वालो को कैदी बना लिया उनकी बहन बेटियों के सिरों से चादरें छीन ली और उन्हें कूफ़ा के बाजार में घुमाया गया। शब्बेदारी का संचालन मौलाना नय्यर अब्बास ने किया। अंजुमनों ने नौहा मातम किया। मातम किया ।अंजुमन अतफाले हुसैनी के साहबे ब्याज जीशान हैदर व मोहम्मद अब्बास के नौहे ‘रोके जैनब ने कहा ऐ मेरे शेर अब्बास, छीन गई सर से रिदा ऐ मेरे शेर अब्बास’ सुन कर अजादार रो पड़े। इस दौरान रफीकुल हसन,अली आबिद, रिजवान हाशमी, सलमानअब्बास, मोहहमद अली, अली रजा, मीसम अब्बासे, महबूब, हैदर अब्बास, नोहाख्वान हिफाजत हुसैन व डॉक्टर क़ासिम, अली अब्बास सहित काफी संख्या में अजादारों की मौजूदगी रही।