फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

संकट घड़ी की रक्षा के लिए दान पुण्य आवश्यक

विज्ञापन
विज्ञापन
मुहम्मदाबाद गोहना। सबको कोई न कोई संयमपूर्वक ऐसा पुण्य अवश्य करना चाहिए जिससे संकट की घड़ी में आपकी रक्षा हो सके। संकट काल में कोई संबंधी स्वजन, धन और दौलत काम नहीं आता, केवल एकमात्र पुण्य दान सेवा व समर्पण कोई न कोई धर्म का ऐसा टुकड़ा ही है जो काम आता है। यह सभी शुभ धर्माचरण है जो मानव की बुद्धि गुहा में आत्मोद्धार के लिए निर्मल बोध प्रविष्ट कराता है।
विज्ञापन

उक्त उद्गगार परमपूज्य संत परमहंस स्वामी ज्ञानानन्द सरस्वती ने श्रीमद भागवत कथा के पांचवें दिवस की प्रवचन में व्यक्त किया। सुरहुरपुर स्थित एपीबीपी स्मृति बालिका इण्टर कालेज के प्रांगण में पिछले पांच दिवसों से कथा सप्ताह महायज्ञ चल रही है। स्वामीज्ञानानन्द सरस्वती ने कथा का विस्तार करते हुए कहा कि यह शरीरधारी स्नेही स्वजनों और संबंधियों के आश्रय में उलझे होते हैं। वह नही जानते कि सगे संबंधी स्वजन देहधारी केवल भोग के साथी हैं संकट के नहीं। संसारी स्वजन केवल सुख के साथी है, दुख के नहीं। कहा कि दु:ख का साथी कौन है ? संकट की घड़ी में जीव गजेंद्र का उद्धार कौन करेगा ? क्योकि कोई जगत का संबंध काम नहीं आ रहा, जिसके साथ जन्म बिताया है। स्त्री पुरुष परिवार सब देख रहे हैं । किसी की शक्ति और दृष्टि काम नहीं आ रही है।
ज्ञानानन्द सरस्वती ने कथा के दौरान ग्राह व गजेंद्र प्रसंग की चर्चा करते हुए कहा कि अनंत काल से देहधारी गजेंद्र और ग्राह का संग्राम जारी है। जीव रूपी देहधारी गजेंद्र की शक्ति क्षीण हो जाती है। महान दु:ख की इस घड़ी में कोई साथी नही है। ग्राह बलवान है, काल बली है। सब भाग खड़े हुए, ग्राह ग्रास बनाता जा रहा है। गजेंद्र अपने संबंधियों के लिए करुण पुकार कर रहा है। अत्यंत दारुण आर्त से दिशाएं भी कराहने लगी हैं, दु:ख भी दु:खी होने लगा है। ऽसुनि विलाप दुखहु दु:ख लागाऽ की ब्याख्या करते हुए कथा मर्मज्ञ स्वामी जी ने कहा कि संकट की भगवान कहते है कि तुम मेरी शरण में आओ मैं तुझे मुक्त करूंगा, मेरा संकल्प है। मैं अपने शरण मे आने वाले भक्त का मृत्यु संसार सागर से उद्धार करता हूँ।कथा के पूर्व महायज्ञ के मुख्य यजमान डॉ. सेन पाठक ने व्यास पीठ का पूजन-अर्चन किया। भाजपा नेता राजेश सिंह %महुआरी% ने स्वामी जी का माल्यार्पण कर स्वागत किया। मंच संचालन तारकेश्वर सिंह एवं धन्यवाद ज्ञापन डॉ. संजीव द्विवेदी ने किया। इस अवसर पर मुख्य रूप से अशीत पाठक, चंदन, किशुनदास, दिनेश मिश्रा, पी.एन.तिवारी, सुरेश पाठक, अगस्त्य जी, विष्णुकांत जी, कालिका सिंह, विजय पाठक, संजीव श्रीवास्तव, कंचन मौर्या, प्राची, मार्कण्डेय राय, डॉ. अजीत, सुरेन्द्रलाल श्रीवास्तव, भूपेंद्र, आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें