मऊ। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश फास्ट ट्रैक कोर्ट नंबर एक आदिल आफताब अहमद ने मारपीट के मामले में चार आरोपियों को दोषी पाते हुए धारा तीन परिवीक्षा अधिनियम का लाभ देते हुए दोषियों के कृत्यों की भर्त्सना करते हुए छोड़ दिया। वहीं सभी को गैरइरादतन हत्या के मामले में संदेह का लाभ देते हुए इन धाराओं में दोषमुक्त कर दिया। मामला मधुबन थाना क्षेत्र का है।
मामले के अनुसार काठतरांव गांव निवासी अवधेश की तहरीर पर रिपोर्ट दर्ज हुई। इसमें गांव के ही रामानंद, पुत्र देवी, लालबहादुर पुत्र अवधविहारी, दामोदर पुत्र दयानंद और अरविंद पुत्र राधेमोहन को नामजद किया। वादी का आरोप है कि आरोपीगण ने उसे एक फरवरी 2006 को मारपीटकर घायल कर दिया। आरोपियों के मारने से वादी को गंभीर चोटे आई। पुलिस ने मामले की रिपोर्ट दर्ज कर बाद विवेचना आरोप पत्र कोर्ट में प्रेषित किया। कोर्ट में अभियोजन की ओर से पैरवी करते हुए एडीजीसी श्रीप्रकाश यादव ने वादी सहित कुल छह गवाहों को पेशकर अपना पक्ष रखा। बचाव पक्ष से एक गवाह गामा चौहान को पेश कर तर्क दिया गया कि उन्हें झूठा फंसाया गया है। एडीजे ने दोनों पक्षों के तर्कों को सुनने तथा पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद आरोपीगण रामानंद, लालबहादुर , दामोदर और अरविंद को गैरइरादतन हत्या के प्रयास में दोषमुक्त कर दिया। वहीं चारों को मारपीट के मामले मेें दोषी पाते हुए परिवीक्षा अधिनियम का लाभ देते हुए छोड़ दिया।