मधुबन के चक्कीमूसा डोही गांव में बाढ़ग्रस्त इलाकों का निरीक्षण करते जिले के प्रभारी मंत्री नंदगोपाल गुप्ता नंदी।
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घाघरा के जलस्तर में घटाव के बाद भी तटवर्ती इलाके के लोग मुश्किल में हैं। जलस्तर में 24 घंटे में पांच सेमी का घटाव दर्ज किया गया। ऐसे में नदी खतरे के निशान से 45 सेमी ऊपर बह रही है। वहीं दोहरीघाट ब्लॉक का सड़ासो तथा मधुबन तहसील क्षेत्र के 10 राजस्व गांव पानी से घिर गए हैं। प्रभावित इलाकों में चारे का संकट उत्पन्न हो गया है। जबकि प्रशासन की तरफ से पर्याप्त मात्रा में नाव की व्यवस्था भी नहीं की जा सकी है।
उफनाई नदी के चलते नगर स्थित मुक्तिधाम, भारत माता मंदिर,सरस्वती मंदिर, खाकी बाबा की कुटी, जानकी घाट, दुर्गा मंदिर, डीह बाबा का मंदिर, डाक बंगला, हनुमान मंदिर सहित ऐतिहासिक धरोहर खतरे में है। वही घाघरा के तटवर्ती इलाकों के दर्जनों गांवों की हजारों एकड़ फसल अभी भी नदी के पानी मे डूबी हुई है।पानी के टकराने से बंधो की स्थिति दयनीय हो गई है। गुरुवार को गौरीशंकर घाट पर घाघरा का जलस्तर 70.35 मीटर रहा। जबकि बुधवार को जलस्तर 70.40 मीटर था।इस तरह 24 घंटे में घाघरा के जलस्तर में पांच सेमी का घटाव दर्ज किया गया। नदी खतरा बिंदु 69.90 मीटर से 45 सेमी ऊपर बह रही है।
नदी के घटाव के बाद भी दोहरीघाट ब्लाक क्षेत्र का सड़ासो,फतहपुर मंडाव ब्लाक क्षेत्र का चक्कीमूसाडोही चौहानपुर, बैरकंटा, बरोहा, मनमन का पुरा, पब्बर का पुरा, नई बस्ती, हाता, बिंटोलिया सहित 10 गांव नदी के घेरे में आ गए हैं। संपर्क मार्ग तथा फसलें जलमग्न होने के चलते पशुओं के लिए चारे का संकट उत्पन्न हो गया है। प्रशासन की तरफ से पर्याप्त नावों की व्यवस्था नहीं की जा सकी है। मधुबन देवारा इलाके के हरेंद्र प्रजापति, रामजीत साहनी, गोरक्ष चंद, दीपचंद प्रसाद का कहना है कि नाव की व्यवथा न होने से जान जोखिम में डालकर पशुओं का चारा लाना पड़ रहा है। इस बाबत एसडीएम मधुबन निरंकार सिंह का कहना है कि मांग के अनुरुप नावों की व्यवस्था के लिए ग्राम प्रधानों को निर्देश दिया गया है।