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कार्रवाई के बाद भी नहीं चेत रहें वाहन चालक

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जिले में करीब पांच वर्ष पूर्व चार दिसंबर 2014 को महासो क्रासिंग पर ट्रेन से स्कूली वैन के टकराने की घटना हुई, इसमें आठ नौनिहालों की मौत तथा चालक सहित पांच घायल हुए थे। इस हृदय विदारक घटना को आज भी जिलेवासी भूल नहीं पाते, इसबीच अन्य कई स्कूली वाहन पलटने जैसी घटनाएं हुईं। घटना के बाद विभाग चेतता है और कार्रवाई पर कार्रवाई करता है, लेकिन समय बीतने के बाद प्रशासन शांत हो जाता है और स्कूल वाहन फिर पुराने ढर्रे पर आ जाते है।
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जिले में निजी कान्वेंट विद्यालयों की संख्या करीब 535 है, इसमें से 23 विद्यालय सीबीएसई बोर्ड से संचालित होते है। इसीक्रम में आरटीओ में 265 वाहनों का पंजीकरण किया गया है। ये वाहन मानक को पूरा करने के बाद पंजीकृत किए गए है। लेकिन इसके इतर कई ऐसे विद्यालय है, जिनके पास विद्यालय के वाहन नहीं है, तो अभिभावक बच्चों को प्राइवेट वाहनों से स्कूल भेजते है। ये वाहन मानक को पूरा नहीं करते, नाही पुलिस और संभागीय परिवहन विभाग इन पर कोई कार्रवाई करता है। हाल ही में करीब साढ़े तीन माह पूर्व हलधरपुर थाने के मुंहवामोढ़ के पास 27 सितंबर को स्कूली वाहन आटो चालक को अनियंत्रित बस ने धक्का मार दिया। इस दुर्घटना में पांच बच्चे घायल हुए। इस घटना के बाद क्षेत्र में तीन छात्रों के मरने की अफवाह फैलने से तोड़फोड़ के साथ हिंसक घटना हुई। हादसे की इस घटना के बाद जिला पुलिस और संभागीय परिवहन विभाग एक बार सचेत हुआ था। इस दौरान जमकर अभियान चला। एआरटीओ अवधेश की मानें तो साढ़े तीन माह में करीब 75 स्कूली वाहनों के विरुद्ध कार्रवाई की गई। इस दौरान करीब दो लाख रुपया समन शुल्क वसूला गया। विभाग का दावा है, कि शहर सहित पूरे जिले में कही भी गैस संचालित वाहन नहीं है।
केवी और फातिमा स्कूल में नहीं है वाहन
मऊ। जिले के कंधेरी गांव में मौजूद केंद्रीय विद्यालय मऊ शहर से करीब 8 किमी पर मौजूद है, इसी तरह से फातिमा स्कूल करीब 5 किमी दूरी पर मौजूद है। दोनों विद्यालयों में काफी अच्छे संख्या में छात्र पढ़ने के लिए जाते हैं, लेकिन दोनों विद्यालयों के पास कोई वाहन स्कूल के नाम से नहीं है। ऐसे में अभिभावक प्राइवेट वाहनों को हायर कर अपने बच्चों को स्कूल भेजते है। मानक की अनदेखी कर चलने वाले इन वाहनों में बच्चों के विरुद्ध कोई कार्रवाई नहीं की जाती। सजग अभिवावक खुद बच्चे को अपनी सुविधा से स्कूल छोड़ने और लाने के लिए जाते है।
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जिले में गैस से चलने वाला कोई वाहन नहीं है, लेकिन यदि कोई वाहन मिला तो उसे सीज करने के साथ उसके स्वामी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करने की कार्रवाई की जाएगी। साथ ही हमेशा स्कूली वाहनों को चेक किया जाता है, जब भी वाहन में मानक के विपरीत कोई गड़बड़ी मिलती है तो उनके विरुद्ध कार्रवाई की जाती है। - अवधेश कुमार, एआरटीओ, मऊ
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