मऊ। जिला अस्पताल में रेडियोलाजिस्ट न होने से मरीजों का अल्ट्रासाउंड नहीं हो पा रहा। यहां पद छह माह से रिक्त चल रहा है। जबकि महिला अस्पताल का रेडियोलॉजिस्ट भी सप्ताहभर से अवकाश पर है। ऐसे में दोनों स्थानों पर मरीज अल्ट्रासाउंड नहीं करा पा रहे। अस्पताल प्रशासन की लापरवाही गरीब मरीजों पर भारी पड़ रही। उन्हें निजी अल्ट्रासाउंड केंद्रों पर जाना पड़ रहा है। शिकायत के बाद भी अभी तक अस्पताल प्रशासन ने व्यवस्था नहीं की है। दोनों अस्पतालों में रोजाना 100 से अधिक मरीज अल्ट्रासाउंड के लिए आते हैं।
जिले की करीब 23 लाख की आबादी के इलाज के लिए जिला अस्पताल, जिला महिला अस्पताल सहित नौ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) और 38 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) संचालित हैं, लेकिन अल्ट्रासॉउंड की सुविधा सिर्फ जिला अस्पताल और महिला जिला अस्पताल में है। जहां सदर अस्पताल में पिछले 6 माह से रेडियालॉजिस्ट न होने से अल्ट्रासॉउंड की जांच नहीं हो रही है, वहीं बीते पांच दिनों से महिला जिला अस्पताल में रेडियालॉजिस्ट के अवकाश पर जाने से जांच प्रभावित हो रही है। दोनों प्रमुख अस्पतालों में रेडियालॉजिस्ट के अभाव में अल्ट्रासॉउंड जांच के अलावा मेडिकोलीगल आदि कार्य ठप हो गए। इससे अस्पताल में आने वाले 100 से ज्यादा मरीज प्राइवेट में अल्ट्रासॉउंड कराने को मजबूर हो रहे है। सूत्रों की मानें तो यह समस्या 16 जनवरी तक रेडियोलॉजिस्ट के अवकाश पर रहने के चलते मरीजों को ओर भुगतनी पड़ सकती है। वहीं जिला अस्पताल में एक फिजीशियन, एक सर्जन और एक बालरोग विशेषज्ञ डॉक्टरों के अवकाश के चलते भी मरीजों को परेशानी उठानी पड़ रही है। सबसे ज्यादा समस्या दूर दराज के ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले मरीजों को हो रही है, जहां जांच और चिकित्सक न होने पर उन्हें प्राइवेट अस्पतालों और जांच केंद्रों का रुख करना पड़ रहा है।
रेडियोलॉजिस्ट के अवकाश पर जाने से यह समस्या आ रही है। सोमवार तक रेडियोलॉजिस्ट के आने पर अल्ट्रासाउंड शुरू करा दिया जाएगा।
डॉ. आरके गुप्ता, सीएमएस, जिला महिला अस्पताल
अन्य सुविधाएं भी बदहाल
मऊ। जिला अस्पताल में पिछले पांच दिनों से एंटी रैबीज वैक्सीन, एंटी बायोटिक सहित कई जरूरी दवाएं नहीं है। कमोवेश यही महिला जिला अस्पताल में है। समस्या के संबंध में जब कोई मरीज अस्पताल प्रबंधन से सवाल जवाब करने पहुंच रहा है तो जिम्मेदारों द्वारा डिमांड भेजे जाने का रटा रटाया जवाब देकर मरीज को टरका दिया जा रहा।
जब पैसा ही देना है तो प्राइवेट में जाएंगे
मऊ। घोसी के पिढवल गांव से आई कौशल्या ने बताया कि वह अपनी बहू को लेकर अल्ट्रासाउंड कराने महिला अस्पताल आई। दो घंटे इंतजार के बाद पता चला कि रेडियोलॉजिस्ट के अवकाश पर रहने से अल्ट्रासाउंड नहीं हो सकेगा। जिस पर उसे प्राइवेट जांच केंद्र पर जाना पड़ा। वहीं कोपागंज से आई सुनीता ने भी बाहर से जांच करवाने की बात कही। कहा कि जब पैसा देकर ही जांच कराना है तो सरकारी अस्पताल में आने का क्या फायदा।