मझवारा। रमजान का महीना सबसे पवित्र और बरकत वाला है। इस महीने इबादत करने का 70गुना सवाब मिलता है। उक्त बातें पवनी स्थित मस्जिद के मौलाना अली हसन ने कही। कहा कि इस्लाम धर्म में पांच फर्ज हैं इसमें पहला रोजा, दूसरा नमाज, तीसरा जकात, चौथा फितरा, पांचवां हज। यानि माह रमजान में 30 दिन रोजा रखना हर मुस्लिम मर्द औरत पर फर्ज है। जो उसे अदा करना चाहिए। रोजा रखने वाले हर शख्स को सुबह सूरज निकलने से पहले नमाजे फज्र से पहले सहरी करनी चाहिए। जिसमें हल्का खाना, दूध, खीर, सेंवई आदि खाना चाहिए।
शाम को मगरिब की नमाज के पहले अजान होने पर रोजा खोलना फर्ज है। रोजे के मायने केवल भूखा रहना नहीं वास्तविक रोजा वह है, जिसमें रोजेदार सुबह सहरी करके कुरान शरीफ की तिलावत करे इसके बाद सुबह की नमाज फज्र अदा करके इसके बाद वह अपने कम धंधे पूरी ईमानदारी के साथ देखे और निगाहें इस तरह रखी जाए जिसमें नफ्स काबू में रहे। किसी को बुरी नजर से न देेखें, गाली न दे न सुने और जुआ, शराब आदि बुरी चीजों से बचें और नाच गाना न देखे, तमाशा सिनेमा न देखे। क्योंकि नजरों का परदा ही वास्तविक पर्दा होता है। इस बात को साइंस ने भी माना है कि रोजा रखने से शरीर की तमाम बीमारियां खत्म हो जाती हैं। खून साफ हो जाता है। रोजा शरीर के लिए दुनियाबी तौर से भी फायदेमंद है। जो कि मुस्लिम को बहुत सवाब और सीधी राह के साथ जन्नत बनाता है। रमजान के माह में हर छोटी से छोटी इबादत से 70 गुना सवाब मिलता है।