मऊ। धान की नर्सरी के पीक आवर में जिले के अधिकांश राजकीय नलकूपों का लाभ सभी किसानों को नहीं मिल रहा है। अधिकांश नलकूपों की नालियां जर्जर हाल में है। नाली क्षतिग्रस्त होने के चलते दूर वाले खेतों में पानी ही नहीं पहुंच पा रहा है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार जिले के 334 नलकूपों में से 17 खराब हैं। पीक आवर में नलकूपों का बेहतर तरीके से उपयोग न होने से धान के नर्सरी सहित जायद की फसल सूख रही है। आला अधिकारी बजट का रोना रोकर मामले से पल्ला झाड़ ले रहे हैं।
जिले में धान की नर्सरी का लक्ष्य 5588 हेक्टेयर तथा धान रोपाई का लक्ष्य 88325 हेक्टेयर निर्धारित किया गया है। मानसून देर से आने की आशंका के चलते किसानों की चिंता बढ़ती ही जा रही है। सिंचाई संसाधनों की स्थिति दयनीय होने से अभी तक शत प्रतिशत नर्सरी नहीं पड़ पाई है। हालत यह है कि धान की नर्सरी लक्ष्य के सापेक्ष 73 प्रतिशत ही पड़ पाई है। अगेती धान की नर्सरी रोपाई योग्य हो गई है, लेकिन सिंचाई संसाधन बदहाल पड़े रहने से किसान रोपाई कराने का साहस नहीं दिखा पा रहे हैं। अभी तक निजी संसाधनों से किसान संडा विधि से रोपाई करा रहे हैं।
जिले में सिंचाई व्यवस्था को बेहतर बनाने लिए शासन की ओर से 334 नलकूप लगाए गए हैं। नलकूपों का रख रखाव सही तरीके से न होने से सिंचाई व्यवस्था दयनीय होती जा रही है। किसानों की मानें तो खरीफ फसल के पीक आवर चल रहा है। बिगड़े पड़े नलकूपों पर नजर डाला जाए तो रतनपुरा ब्लाक क्षेत्र के मेउड़ीकला, मझौली, साहूपुर, जगभानपुर, बड़रांव ब्लाक क्षेत्र के रियांव, भटमीला, बड़रांव, बसावनपुर, अमिला, हरधौली, सरवां गरीबपुर सहित 17 राजकीय नलकूप खराब पड़े हैं। अधिकांश नलकूपों की नालियां क्षतिग्रस्त हैं। शासन से मांग के अनुरूप बजट का आवंटन न होने से मरम्मत कार्य अधर में है। अधिकारियों की मानें तो खराब पड़े नलकूपों के मरम्मत कार्य में लगभग दो हफ्ते का समय लग जाता है, लेकिन महीनों तक नलकूप खराब पड़ रहे हैं। रानीपुर, फतहपुर मंडाव, बड़रांव ब्लाक क्षेत्र के अधिकांश राजकीय नलकूपों की नालियां क्षतिग्रस्त होने के चलते दूर वाले खेतों में पानी पहुंच ही नहीं पाता है। यही हाल अन्य ब्लाकों का है। इस बाबत अधिशासी अभियंता नलकूप मांगे राम का कहना है कि नलकूप के जले मोटर व अन्य तकनीकी गड़बड़ी को 15 दिन के अंदर ठीक करा दिया जाता है। क्षतिग्रस्त नालियों की मरम्मत के लिए शासन से बजट की मांग की गई है।