शासन की गेहूं खरीद योजना का लाभ किसानों को नहीं मिल रहा। गेहूं बेचने के महीनों बाद भी भुगतान नहीं किया जा सका है। जबकि 72 घंटे के अंदर राशि किसानों को खाते में भेजने का प्रावधान है। एजेंसियों पर ऐसे 143 किसान हैं जिनका एक करोड़ 28 लाख का बकाया चल रहा है। ऐसे में किसान पैसे के लिए क्रय केंद्र से लेकर अधिकारियों के कार्यालय का चक्कर लगा रहे। किसानों को अधिक ब्याज पर कर्ज लेकर काम चलाना पड़ रहा है। शिकायत के बाद भी सुनवाई न होने से परेशान किसानों ने आंदोलन करने का अल्टीमेटम दिया है।
किसानों को फसल का उचित मूल्य दिलाने के लिए शासन की तरफ से गेहूं खरीद योजना शुरू की गई है। इसके लिए जिले में 73 गेहूं क्रय केंद्र बनाए गए हैं। किसानों को तीन दिनों के अंदर भुगतान किए जाने का नियम है लेकिन बावजूद इसके किसानों का गेहूं खरीद करने के महीनों बाद भी बकाया धनराशि उनके खातों में नहीं भेजी जा रही है। बकाया भुगतान के लिए परेशान किसान क्रय केंद्रों से लेकर अधिकारियों के कार्यालय का चक्कर काटने को विवश हैं।
पीसीएफ एजेंसी पर किसानों का 128 लाख का बकाया चल रहा है। बकाया पैसे का भुगतान न होने से किसानों की मुश्किलें बढ़ती ही जा रही है। धान की नर्सरी डालने, शादी विवाह और अन्य कामों के लिए किसानों को अधिक ब्याज पर कर्ज लेकर काम चलाना पड़ रहा है। उनका कहना है कि वह आर्थिक रूप से कमजोर हो रहे।
इस बाबत जिला खाद्य विपणन अधिकारी दिनेश तिवारी का कहना है कि एजेंसियों के प्रबंधकों से विवरण मांगा गया है। एक हफ्ते के अंदर ही किसानों के खाते में बकाया धनराशि भेज दी जाएगी।