प्रदेश सरकार द्वारा बीज, उर्वरक, कीटनाशक और कृषि उपकरणों पर दी जाने वाली सब्सिडी एक साल से भी अधिक समय से हजारों किसानों के बैंक खातों में नहीं आ रही है। किसान इन सामानों की नगद खरीद करके सब्सिडी की आस जोह रहे हैं। लेकिन उन्हें निराशा मिल रही है। विभागीय अधिकारियों की उपेक्षा से जिले के लगभग डेढ़ हजार किसानों को बीज और अन्य कृषि उपकरणों पर अनुुदान नहीं मिला है।
प्रदेश सरकार ने किसानों को सीधे दी जाने वाली छूट को बंद कर उनके बैंक खातों में अनुदान भेजने की व्यवस्था कर रखी है। किसानों को संशोधित बीज जैसे गेहूं, जौ, सरसो, चना मटर, बाजारा, धान, उन्नतिशील गन्ना आदि सभी फसलों के बीजों को पूरे मूल्य पर खरीदने की व्यवस्था की है। इनके अलावा कृषि यंत्र जैसे ट्रैक्टर, रोटावेटर, डीजल पंप, स्प्रे मशीन सहित खेती में काम आने वाले तमाम उपकरणों पर सरकार सब्सिडी अब केवल बैंक खातों में ही भेजी जाती है। कृषि उपकरणों को पहले यूपी एग्रो के माध्यम से किसानों को उपल्ब्ध कराया जाता था। उपकरणों के मूल्य में से सब्सिडी की रकम घटाकर किसानों से भुगतान लिया जाता था।
इस व्यवस्था में आने वाली शिकायतों को दूर करने के लिए सरकार ने सब्सिडी बैंक खातों में भेजने की व्यवस्था की। लेकिन विभागीय अधिकारियों कर्मचारिरयों की उदासीनता से किसानों को सब्सिडी समय पर नहीं मिल पा रही है। एक अनुमान के अनुसार जिले में इस तरह के अनुदान न पाने वाले किसानों की संख्या डेढ हजार से भी अधिक है। किसान नेेता और लोकदल के प्रदेश सचिव देवप्रकाश राय कहते हैं कि विभागीय अधिकारियों की लापरवाही से किसानों के बैंक खातों में अनुदान की रकम नहीं जा रही है। किसान अधिकारियों के दफ्तरों का चक्कर लगा रहा।