मथुरा। जिला अस्पताल में प्रतिदिन 14 सौ से अधिक मरीजों की ओपीडी होती है। इनमें 200 से अधिक मरीज युवा होते हैं। जो हाई बीपी, शुगर से जुड़ी शिकायत लेकर पहुंच रहे हैं। जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. नीरज अग्रवाल ने बताया कि पहले यह बीमारियां जहां 45-50 वर्ष की उम्र के बाद अधिक देखने को मिलती थीं। वहीं अब 25-30 साल के युवाओं में भी इसके लक्षण तेजी से सामने आ रहे हैं।
उन्होंने कहा कि बदलती जीवनशैली, फास्ट और जंक फूड का बढ़ता सेवन, शारीरिक श्रम की कमी, देर रात तक जागना और तनावपूर्ण दिनचर्या युवाओं को बीमार बना रही है। मोबाइल फोन, लैपटॉप और अन्य डिजिटल उपकरणों का अत्यधिक उपयोग भी नींद और मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर रहा है। युवाओं में आगे चलकर यह बीमारियां गंभीर हृदय रोग या स्ट्रोक का कारण बन सकती हैं। यही वजह है कि इन्हें ‘साइलेंट किलर’ भी कहा जाता है। समय पर जांच और इलाज न होने पर स्थिति और गंभीर हो सकती है।
जिला अस्पताल के फिजिशियन डॉ. रवि माहेश्वरी ने युवाओं को समय रहते सतर्क रहने की सलाह दी है। उनका कहना है कि नियमित स्वास्थ्य जांच, संतुलित और पौष्टिक आहार, रोजाना व्यायाम और पर्याप्त नींद से इन बीमारियों से काफी हद तक बचाव किया जा सकता है। तनाव को कम करने के लिए योग और ध्यान को दिनचर्या में शामिल करना भी जरूरी है।