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सफाई पर करोड़ों खर्च के बाद भी यमुना बदहाल

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मथुरा। यमुना में पड़ी गंदगी। - फोटो : MATHURA
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मथुरा। सफाई के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी यमुना बदहाल है। मथुरा-वृंदावन के 36 नालों की गंदगी को यमुना में जाने से नहीं रोका जा सका है। नगर निगम, जल निगम और सिंचाई विभाग सफाई की जिम्मेदारी एक-दूसरे पर टालते रहे हैं। हाल ही में यमुना मिशन द्वारा सिल्ट हटाई गई, जिसके बाद करीब 12 घाटों पर गंदगी का अंबार हो गया है। श्रद्धालु इन घाटों तक नहीं पहुंच सकते। विश्राम घाट, स्वामी घाट, बंगाली घाट पर श्रद्धालुओं की संख्या अधिक रहती है, लेकिन सफाई पर ध्यान नहीं दिया जा रहा। हालांकि नमामि गंगे के कर्मचारी घाटों की सफाई के लिए तैनात हैं, लेकिन उनका कार्य खानापूरी तक ही सीमित है।
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यमुना करोड़ों लोगों की श्रद्धा का केंद्र है, लेकिन मथुरा-वृंदावन के 36 नालों के गंदे पानी ने यमुना को बदहाल कर दिया है। शहर के मसानी, अंबाखार, गऊघाट, चक्रतीर्थ, कंश किला, स्वामी घाट क्षेत्र के नाले नहर की तरह यमुना में गिर रहे हैं। नाले के पानी में कूड़ा-कचरा, मरे जानवर, फैक्टरियों का केमिकलयुक्त पानी, जूते-चप्पल यमुना में पहुंच रहे हैं। यह गंदगी मथुरा-वृंदावन के दो दर्जन से अधिक घाटों पर पहुंचती है। गंदगी के कारण अधिकांश घाटों पर श्रद्धालुओं ने जाना भी बंद कर दिया है।
हाल ही में यमुना मिशन ने यमुना से सिल्ट निकालने का काम किया, लेकिन बारिश का पानी आ जाने के बाद काम बंद हो गया। फिलहाल महादेव घाट, श्मशान घाट, ध्रुव घाट, सप्तऋषि घाट, सूर्य घाट, मर्कंडका घाट, सकरकुई घाट, स्वामी घाट, गौ घाट, चक्र तीर्थ घाट, कंश्वेश्वर घाट, कृष्ण गंगा घाट पर यमुना से निकली सिल्ट डाल दी गई है, जिससे प्राचीन घाटों पर गंदगी का अंबार है।
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गंदगी रोकने को लगाए जाल बह गए
यमुना में नालों की गंदगी जाने से रोकने के लिए विश्व धर्म रक्षक दल के संस्थापक विजय चतुर्वेदी ने विश्राम घाट, स्वामी घाट, असकुंडा घाट और दौलामौला घाट पर जाल लगवाए थे। काफी समय तक जालों ने गंदगी को रोके रखा लेकिन जाल यमुना में बह गए। विजय चतुर्वेदी का आरोप है कि नगर निगम ने जालों को यमुना में बहा दिया। उन्होंने कहा कि मसानी से बंगाली घाट तक अंडरग्राउंड पाइप लाइन से नालों का पानी निकाला जाए तो समस्या का समाधान हो सकता है।
सफेद हाथी बने खड़े हैं सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट
यमुना में जा रहे नालों के पानी को साफ कर उपयोग में लाने के लिए सीवरेज ट्रीटमेेंट प्लांट (एसटीपी) लगाए गए, लेकिन ये प्लांट सफेद हाथी बने हैं। नालों का दस फीसदी पानी प्लांट में जा रहा है तो नब्बे फीसदी पानी सीधे यमुना में जा रहा है। एक एसटीपी मसानी नाले पर है, जिसका कोई लाभ नहीं मिल रहा।
बंगाली घाट से स्वामी घाट तक एक किलोमीटर के एरिया में यमुुना से सिल्ट निकाली गई थी। पोकलेन मशीन, जेसीबी और ट्रैक्टर लगाकर सिल्ट निकाली गई। वर्तमान में यमुना से सिल्ट निकालने का काम नहीं हो रहा है।
- अरुण शर्मा, सदस्य यमुना मिशन
यमुना से गीली सिल्ट निकालकर घाटों के आगे रखी गई है। सिल्ट सूखने के बाद वहां से हटाकर अन्य उपयोग में लाई जाएगी। घाटों की सफाई के लिए कर्मचारी भी लगाए गए हैं।
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- रिजवान अहमद, एई नगर निगम।
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