गाड़ियों पर लिखे जा रहे गलत पदनाम
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बड़ा बारीक सा पूर्व। ऐसा कि किसी को दिखाई न दे। लेकिन पदनाम मोटा-मोटा सा। जैसे पूर्व विधायक, पूर्व ब्लाक प्रमुख, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष, पूर्व जिला पंचायत सदस्य, पूर्व चेयरमैन वगैरह..वगैरह। ये तो सरासर धोखा है जनाब। अपना रसूख बनाए रखने के लिए सबकुछ किया जा रहा है।
मथुरा की सड़कों पर दौड़ने वाली लग्जरी गाड़ियों को देखेंगे तो गाड़ियों पर लिखे पदनाम बहुत दूर से नजर आ जाएंगे। तमाम ने तो शीशे पर ही मोटा-मोटा लिखवा दिया है। हालांकि यह सब परिवहन नियमावली के खिलाफ है लेकिन किसी का ध्यान इस तरफ नहीं जा रहा है। कई गाड़ियों पर तो नंबर प्लेट छोटी है और पदनाम की प्लेट लंबी-चौड़ी।
पूर्व विधायक लिखी तो इतनी गाड़ियां दौड़ रही हैं कि मानो ब्रज क्षेत्र के सारे पूर्व विधायक मथुरा में ही आ गए हों। कलक्ट्रेट, एसएसपी आफिस, प्राधिकरण कार्यालय, राजीव भवन और जिला अस्पताल पर जाकर देखिए ऐसे वाहन नजर आ ही जाएंगे। कई पूर्व ब्लाक प्रमुख और जिला पंचायत सदस्यों की गाड़ियों से तो पूर्व ही धीरे-धीरे गायब हो रहा है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर हमारे नेता साबित क्या करना चाहते हैं। इनकी गाड़ियों पर हूटर भी लगा हुआ है। जबकि हूटर नियमानुसार नहीं लगा सकते।
अपने शहर में जाने कितने वीआईपी
कुछ गाड़ियां ऐसी भी दौड़ रही हैं जिन पर वीआईपी लिखा हुआ है। अब यह वीआईपी कौन हैं इसकी जानकारी किसी को नहीं है। न ही कोई पदनाम लिखा गया है। मगर यह वीआईपी गाड़ियां कलक्ट्रेट में धड़ल्ले के साथ खड़ी होती हैं। मगर आज तक किसी ने यह पूछने की कोशिश नहीं की कि वीआईपी कौन हैं। कहां के रहने वाले हैं।
अभियान चलाया जाएगा, एसपी ट्रैफिक
एसपी ट्रैफिक आशुतोष द्विवेदी का कहना है कि इसके लिए अभियान चलाया जाएगा। इस तरह के जो वाहन दौड़ रहे हैं उनका चालान कराया जाएगा। परिवहन के नियमों का तो पालन सभी को करना होगा। इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही नहीं होने दी जाएगी।