करीब पांच हजार साल पुरानी भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं के साक्ष्यों को समेटे मथुरा प्राचीन शहरों में शुमार है। यहां भगवान श्रीकृष्ण के लीलास्थलों की पौराणिकता को देखते हुए केंद्र सरकार ने इसे हेरिटेज सिटी के रूप में चुना है। इसी तर्ज पर विकास कराए जाने की योजना तैयार की जा रही है।
मथुरा में भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं से जुडे़ श्रीकृष्ण जन्मस्थान निकट पोतराकुंड, गोवर्धन का कुसुम सरोवर, रसखान की समाधि सहित एक दर्जन से अधिक ऐसे टीले है जहां दो से ढाई हजार साल पुरानी मूर्तियों का खजाना मिला है। इन स्थलों के संरक्षण का कार्य भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के अधीन हो रहा है।
इसके अलावा मथुरा-वृंदावन में यमुना के प्राचीन घाट, गोविंद देव का मंदिर, पौराणिक महत्व के कुंडों सहित ब्रज चौरासी कोस के स्थलों को संरक्षित करने की आवश्यकता है।
टीलों में छिपा मूर्तियों का खजाना
मथुरा। राजकीय संग्रहालय के अभिलेख बताते है कि मथुरा में कई टीलों के नीचे से कुषाणकालीन, बुद्ध, महावीर और मौर्य काल की मूर्तियों का खजाना है। इनमें गौसना का टीला, कंकाली टीला, सौंख टीला आदि प्रमुख हैं। इन टीलों को राज्य और केंद्र सरकार ने अपने संरक्षण में ले रखा है।
विदेशों के संग्रहालय में मथुरा की मूर्तियां
मथुरा। मथुरा कला की मूर्तियां देश के बड़े संग्रहालयों के साथ ही विदेशों के संग्रहालय में भी सजी हैं। ये मूर्तियां कोलकाता, लखनऊ और दिल्ली के संग्रहालय के अलावा जापान, जर्मनी, लंदन, ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका के संग्रहालय में देश की गौरवगाथा सुना रही हैं।
मथुरा में भगवान श्रीकृष्ण की लीला से जुड़े यमुना के प्राचीन घाट और जाट राजाओं द्वारा गोवर्धन में तैयार कराए गए कुसुम सरोवर के अधिक संरक्षण की आवश्यकता है, जिससे आने वाली पीढ़ी इनका महत्व जानने के साथ इन साक्ष्यों को निहार सकें।
डा. एसपी सिंह, सहायक निदेशक, राजकीय संग्रहालय मथुरा