इकतीस मार्च की रात तक विभागों को खूब बजट मिला। सत्तर करोड़ से भी ज्यादा धनराशि महकमों में आई। 10 करोड़ रुपये का विभाग खर्चा नहीं दिखा पाए लिहाजा इस धनराशि को सरेंडर कर दिया गया। ट्रेजरी भी देर रात तक खुली रही।
वित्तीय वर्ष 2016-17 शुक्रवार को खत्म हो गया। इसके खत्म होने से चंद घंटे पहले तक सरकारी कार्यालयों में बजट की आपाधापी मची रही। किसी ने लंबित बजट को पाने के लिए लखनऊ मुख्यालय के फोन खटखटाए तो कोई वापस करने के लिए हिसाब बनाता रहा। वित्तीय वर्ष का अंतिम दिन लिपिक से लेकर अफसर तक बजट को लेकर जुटे रहे।
इस अंतिम दिन जिला बेसिक शिक्षा विभाग को 25 करोड़ रुपये प्राप्त हुए हैं। ये राशि वेतन मद में मिली है। इसके अलावा यूनिफार्म और मिड-डे मील में भी बजट हासिल हुआ। जिला पंचायत राज्य अधिकारी के खाते में करीब तीन करोड़ रुपये आए हैं। ये राशि मथुरा, चौमुंहा और नौहझील ब्लॉक के विकास से जुड़ी है। इसी तरह मथुरा-वृंदावन विकास प्राधिकरण को स्टांप के दो प्रतिशत से मिलने वाला स्थापना का करीब चार करोड़ रुपये मिला है। इसके अलावा भी अनेक विभागों को वेतन मद में शासन ने धनराशि जारी की है।
जबकि अल्पसंख्यक विभाग ने एक करोड़ रुपया वापस कर दिया। यह राशि बाउंड्रीवाल के लिए आई थी। पिछड़ा वर्ग विभाग ने भी 98 लाख रुपये वापस किए हैं। डीपीआरओ ने 1.34 करोड़ वापस किए हैं। बताया गया कि करीब दस करोड़ रुपये सरेंडर किए गए हैं।
इस तरह विकास विभाग के साथ अन्य विभागों में भी बजट का लेनदेन शुक्रवार को दिन भर कागजों पर चलता रहा। जिला कोषागार कार्यालय देर रात तक इस लेनदेन के चलते खुलता रहा।