धौलीप्याऊ क्षेत्र में शुक्रवार की दोपहर को करीब बारह बजे आर्मी के बंद पड़े तेल डिपो के करीब एक हैंडग्रेनेड मिलने से दहशत फैल गई। ग्रेनेड सड़क किनारे कूड़े के ढेर में पड़ा था जिसे बम निरोधक दस्ते ने कब्जे में ले लिया। बीडीएस की टीम इसे डिफ्यूज करने के लिए गोकुल बैराज लेकर पहुंची लेकिन वहां देखा तो हैंडग्रेनेड में सेफ्टी पिन नहीं थी। एक्सपर्ट का कहना है कि इससे कोई खतरा नहीं था।
सुरक्षा के लिहाज से बेहद संवेदनशील माने जाने वाले मथुरा में दोपहर को उस वक्त हड़कंप मच गया जब धौलीप्याऊ में आर्मी के तेल डिपो के करीब ज्योति अस्पताल के सामने हैंडग्रेनेड बरामद हुआ। तत्काल बम निरोधक दस्ता और पुलिस अफसर मौके पर पहुंच गए। धौलीप्याऊ रोड पर ट्रैफिक को तत्काल बंद कर दिया गया। कूड़े के ढेर से हैंडग्रेनेड को निकालकर बीडीएस की टीम गोकुल बैराज के पास ले गई। वहां जाकर चेक किया तो उसमें पिन नहीं थी। एक्सपर्ट ने माना कि यह खराब था। करीब एक घंटे तक पुलिस ट्रैफिक को रोके रही। हैंडग्रेनेड हटाने के बाद ही सड़क को लोगों के लिए शुरू किया गया।
एसपी सिटी अशोक कुमार सिंह ने बताया कि हैंडग्रेनेड कूड़े के ढेर में बरामद हुआ था। वहां के कुछ लोगों ने देखा तो पुलिस को सूचना दी थी। इस ग्रेनेड पर हैवी ब्लास्ट एचई-36 लिखा हुआ है। हरे रंग का ग्रेनेड है। माना जा रहा है कि आर्मी में ही हरे रंग का ग्रेनेड होता है।
हाईवे से धौलीप्याऊ नहीं आने दिया ट्रैफिक
मथुरा। हैंडग्रेनेड मिलने के बाद पुलिस अलर्ट हो गई थी। हाईवे से धौलीप्याऊ को ट्रैफिक नहीं आने दिया गया। वहीं खुफिया एजेंसियों ने भी डेरा डाल दिया था। देर शाम तक चेकिंग होती रही। ज्योति हास्पिटल के करीब जहां हैंडग्रेनेड पड़ा मिला था उससे आगरा-दिल्ली रेलवे लाइन 300 मीटर है जबकि नेशनल हाईवे-2 300 मीटर की ही दूरी पर है। धौलीप्याऊ से हाईवे को कनेक्ट करने वाली रोड पर भी भारी ट्रैफिक रहता है लिहाजा पुलिस ने वाहनों का आवागमन रोक दिया था। अचानक ट्रैफिक को रुकता देख हड़कंप मच गया था।
लोग बेचैन हो गए। हर किसी की जुबान पर एक ही सवाल था कि क्या हो गया है। बाद में पुलिस ने जब ट्रैफिक खोला तो सभी को बताया गया कि हैंडग्रेनेड मिला था। यह ग्रेनेड खराब है लिहाजा डरने की कोई बात नहीं है। खुफिया विभाग की टीमें भी यहां पहुंच गईं थीं। आसपास के इलाकों में भी चेकिंग की गई।
राकेट लांचर तोड़ते वक्त हो गया था विस्फोट
-साल 2010 में मथुरा-वृंदावन रेलवे लाइन स्थित नई बस्ती में स्क्रेप में आए सेना के रॉकेट लांचर को तोड़ते वक्त हुए विस्फोट में छह लोगों की मौत और तीन गंभीर हुए थे।
-साल 2005 में एक कॉलेज के बाहर बम धमाके में दो की मौत, कबाड़े में आए बम को तोड़ते वक्त हुआ हादसा
-साल 1993 में भार्गव गली में बम बनाते वक्त हुए धमाके में दो युवकों की मौत