ठाकुरजी अपने भक्तों की भावनाओं के वशीभूत हैं। भक्त भी इसी आस्था के साथ भाव सेवा में कोई कसर नहीं छोड़ते। गर्मी और बरसात के बाद अब आराध्य को ठंड से बचाने के जतन किए जा रहे हैं। भक्तों की मांग कहीं अधूरी नहीं रह जाए इसके लिए बाजार भी तैयार हो गया है।
बता दें कि भाव सेवा के अंतर्गत अब धर्मनगरी के मंदिरों में ठाकुरजी को रंग बिरंगे ऊनी वस्त्र पहनाए जाएंगे। भक्तों का प्रयास रहेगा कि हर हाल में ठाकुर जी को ठंड से बचाया जाए। इस प्रकार के अनुष्ठान से बाजार भी भलीभांति परिचित है।
इसलिए सर्दी शुरू होते ही धर्मनगरी की दुकानों पर विभिन्न रंग की ऊनी और फेदर की पोशाक देखी जा सकती हैं। बांके बिहारी मंदिर क्षेत्र में पोशाक के व्यवसायी दीपक गोयल ने बताया कि ऊनी पोशाक को तैयार करने का कार्य सर्दी के मौसम से पहले ही शुरू हो जाता है।
अब इनकी मांग बढ़ जाएगी। उन्होंने बताया कि ठाकुरजी के लिए पोशाकों कीकीमत 50 रुपये से हजारों रुपये तक है। पोशाकों को कारीगर क्रोशिया के द्वारा हाथों के साथ-साथ या मशीनों से भी तैयार करते हैं।
भाव सेवा के बढ़ते महत्व के कारण वृंदावन का पोशाक निर्माण उद्योग कुटीर उद्योग के रूप में विकसित हो रहा है। दुकानदार गोविंद अग्रवाल ने बताया कि धर्मनगरी में यह व्यवसाय करोड़ों रुपये का है। वस्त्र विक्रेता मनीष ने बताया कि विदेशी भक्त पोशाकों के बड़े ग्राहक हैं।