मथुरा में वन्यजीव बचाव अभियान में वाइल्डलाइफ एसओएस ने गोवर्धन क्षेत्र स्थित तरौली गांव से दो हॉग हिरण-एक नर और एक मादा शावक को बचाया। दोनों जानवर जंगली कुत्तों के झुंड द्वारा घायल किए जाने के बाद गांव में आ गए थे। ग्रामीणों ने इसकी सूचना संबंधित अधिकारियों को दी। दो दिन में चिकित्सा उपचार के बाद सुरक्षित उन्हें जंगल में छोड़ दिया गया।
वाइल्डलाइफ एसओएस में पशु चिकित्सा सेवाओं के उप निदेशक डॉ. इलियाराजा ने बताया कि दोनों हिरणों को तुरंत पशु चिकित्सा ध्यान और सहायक देखभाल मिली। इससे उन्हें काफी जल्दी आराम मिल गया है। बिल्कुल स्वस्थ होने के बाद दोनों हिरण को सुरक्षित वन क्षेत्र में उनके प्राकृतिक आवास में वापस छोड़ दिया गया।
वाइल्डलाइफ एसओएस के सह-संस्थापक और सीईओ कार्तिक सत्यनारायण ने ग्रामीणों की भागीदारी की प्रशंसा करते हुए कहा कि यह सफल बचाव सामुदायिक जागरूकता और त्वरित कार्रवाई के महत्व को दर्शाता है।
वाइल्डलाइफ एसओएस में डायरेक्टर कंजरवेशन प्रोजेक्ट्स, बैजूराज एमवी ने कहा कि दुर्भाग्य से इस तरह की घटनाएं आम होती जा रही हैं, क्योंकि वन्यजीवों के आवास लगातार कम होते जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय हॉग हिरण को आईयूसीएन रेड लिस्ट में लुप्तप्राय प्रजाति के रूप में सूचीबद्ध किया गया है। वे दक्षिण एशिया और दक्षिण पूर्व एशिया में पाए जाते हैं, और उनका निवास स्थान गीले और ऊंचे घास के मैदानों से लेकर दलदल, नदी के किनारे के क्षेत्रों तक भिन्न होता है।