बबलू के शहीद होने की खबर घर वालों को शनिवार की शाम को मिल गई थी। लेकिन परिवार वालों ने बबलू की पत्नी रविता को यह नहीं बताया। घर का माहौल भी ऐसा नहीं होने दिया जिससे उसे कुछ पता चले। लेकिन लोगों के चेहरे पर भाव भांपने लगी थी रविता। घर आने वाली महिलाओं से कहती, भाभीजी, पता नहीं क्या बात है आज सब मुझे बड़ी अजीब तरह से देख रहे हैं। दिल घबरा रहा है मेरा भी।
झंडीपुर निवासी मलूक सिंह के बेटे बबलू की शादी वर्ष 2004 में रविता के साथ हुई थी। इनके दो बच्चे भी हैं। बेटा दरुणा चौधरी है और बेटी गरिमा है। अब यह परिवार मथुरा के बालाजीपुरम में रह रहा है। शनिवार को शाम को अचानक फोन आया कि बबलू शहीद हो गए हैं। फोन छोटे भाई सोनू ने सुना। क्योंकि बबलू की पत्नी रविता और बच्चे भी पास में ही थे लिहाजा सोनू ने अपने आंसुओं को रोक लिया और किसी तरह पिता को जानकारी दी।
रविता पर किसी ने कुछ जाहिर नहीं होने दिया। जब फोन के बारे में पूछा गया तो कह दिया कि गांव में बाबाजी की तबीयत ज्यादा खराब है। क्योंकि रविवार की सुबह तक आसपास के लोग जान चुके थे लिहाजा आना-जाना शुरू हो गया। परिवार वालों ने लोगों से कह दिया था कि घर पर किसी को बताया नहीं है लिहाजा कुछ ऐसा न करें जिससे पता चल जाए। रविता को सब मिलते लेकिन कुछ बोल नहीं रहे थे। लेकिन आने वाले लोगों के हावभाव देखकर उसकी घबराहट जरूर बढ़ रही थी। रविता ने कहा भी कि आज कुछ अच्छा नहीं लग रहा है।
कोने में खड़े होकर सुबकते रहे घर वाले
जिसके घर का लाल चला जाए वह भला अपने आंसुओं को कैसे रोक सकता है। लेकिन बबलू की पत्नी और बच्चों को पता न चले इसके लिए घर के सारे मर्द कोने में खड़े होकर सुबकते रहे। कोई रास्ते में आ गया तो कोई मकान की छत पर चला गया। रविवार की शाम तक भी रविता अपने पति की मौत से अनजान थी। वह रोजमर्रा की तरह ही अपने काम कर रही थी।