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एसपी सिटी को पिटते छोड़ भागने वाले कब नपेंगे

Sun, 12 Jun 2016 11:51 PM IST
अमर उजाला मथुरा
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जवाहर बाग - फोटो : अमर उजाला
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जब जवाहर बाग के कब्जाधारियों ने हमला किया तो एसपी सिटी मुकुल द्विवेदी को पिटता छोड़कर  उनके साथ के पुलिस अफसर भाग गए थे। अगर उन्होंने हिम्मत दिखाई होती तो शायद आज स्थिति कुछ और ही होती। एक जांबाज पुलिस अधिकारी को पुलिस ने न खोया होता। सब जान भी रहे हैं कि कौन भागे थे। पूरे साक्ष्य पुलिस के पास हैं मगर दोषियों पर कार्रवाई नहीं हो रही है। जबकि अब तक तो इन अफसरों को सस्पेंड कर दिया जाना चाहिए था। सोमवार को जब मुख्यमंत्री मथुरा में पहुंचेंगे तो उनके सामने भी यह सवाल गूंजना लाजमी है।
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दो जून की शाम को करीब साढ़े पांच बजे एसपी सिटी मुकुल द्विवेदी दो पुलिस क्षेत्राधिकारी, तीन एसओ और नौ हमराह के साथ जवाहर बाग में की बाउंड्री तुड़वाने पहुंचे थे। अभी जेसीबी ने दीवार तोड़ी ही थी कि कब्जाधारियों ने हमला कर दिया। एसपी सिटी को पकड़ लिया और बाग में खींचकर ले गए। यहां उनके सिर पर वार किए गए। बताया जाता है कि एसपी सिटी मदद के लिए पुकारते रहे मगर किसी ने सुनी तक नहीं। सभी अधिकारी भागकर बाग से बाहर आ गए थे। गंभीर रूप से घायल एसपी सिटी की बाद में उपचार के दौरान मौत हो गई थी। कब्जाधारियों की भीड़ ने थानाध्यक्ष की भी गोली मारकर हत्या कर दी थी।

बड़े अफसर क्यों नहीं निकले थे कोठियों से
सब जान रहे थे कि कब्जाधारियों के पास अवैध असलहे हैं। गोला-बारूद है। संख्या भी डेढ़ हजार से अधिक है। शासन तक भी इस आशय की रिपोर्ट समय-समय पर जाती रही। लेकिन फिर भी इस पूरे आपरेशन को लापरवाही से लिया गया।
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जब सारे अधिकारी जान रहे थे कि कब्जाधारियों की संख्या काफी है तो उसी हिसाब से फोर्स उतारना चाहिए था। चारों तरफ से बाग को घेरकर कार्रवाई की जाती। आईजी, कमिश्नर, डीएम और एसएसपी समेत सभी आला अफसरों को इस पूरे आपरेशन के दौरान रहना चाहिए था। लेकिन केवल एसपी सिटी को ही चंद पुलिस अफसरों के साथ भेज दिया गया। दो पुलिस अफसरों पर हमले की घटना के बाद डीएम और एसएसपी पहुंचे। कमिश्नर और आईजी भी दो जून की शाम को पहुंचे। कायदे में पूरी योजना के साथ पुलिस को अटैक करना चाहिए। लेकिन प्लानिंग उस तरह से की ही नहीं गई।

गोला-बारूद, इतने हथियार कहां से आए
जवाहर बाग से पुलिस ने भारी मात्रा में हथियार बरामद किए हैं। गोला-बारूद भी मिला। कारतूस मिले। आखिर इतना गोला-बारूद आया कहां से। कौन था जो इन्हें असलहों की सप्लाई कर रहा था। लग्जरी गाड़ियां भी तमाम बरामद हुई हैं। इन गाड़ियों को किसने दिया था रामवृक्ष को।

          
कहां से आ रही थी इतनी रसद
करीब डेढ़ हजार लोगों के खाने का प्रबंध था जवाहर बाग में। गाड़ियों से भरकर गेहूं और चावल पहुंचता था। दूध आता था। सब्जियों की सप्लाई थी। ये बड़ा सवाल है कि आखिर यह रसद आ कहां से रही थी। कौन था जो जवाहर बाग में बैठे लोगों को रसद उपलब्ध करा रहा था। हर रोज ट्रक बाग के अंदर दाखिल होते थे लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।

प्रदेश में क्यों बढ़ रहे हैं पुलिस पर हमले
यूपी में पुलिस पर हमले बढ़ रहे हैं। क्या वजह है कि हर रोज किसी न किसी शहर में पुलिस पर हमला हो जाता है। कभी भीड़ हमला कर देती है तो कभी अपराधी। क्या राजनीतिक दबाव में है पुलिस। कब पुलिस को खुलकर काम करने की आजादी मिलेगी। 
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