योगीराज श्रीकृष्ण ने अपने भक्तों को सुख देने के लिए ब्रज मंडल में अनेक लीलाएं की हैं। एक बार गोपियों को सुख पहुंचाने के लिए बाल कृष्ण लाठियों के डर से गायों के खिरक में जा छिपे।
पौराणिक मान्यता है कि भगवान श्रीकृष्ण गोपियों को कई तरह से परेशान किया करते थे। कभी उनकी मटकी फोड़ देते तो कभी चीरहरण कर लेते। एक बार बरसाना की गोपियों ने कृष्ण को सबक सिखाने की योजना बनाई। उन्होंने कृष्ण को उनके सखाओं के साथ बरसाना होली खेलने का न्यौता दिया। श्रीकृष्ण और ग्वाल जब होली खेलने बरसाना पहुंचे तो उन्होंने देखा कि बरसाना की गोपियां हाथ में लाठियां लेकर खड़ी हैं।
लाठियां देख ग्वाल-बाल भाग गए। अब श्रीकृष्ण अकेले पड़ गए और गायों के खिरक में जा छिपे। जब गोपियों ने कान्हा को ढूंढा और यह कह कर बाहर निकाला कि ‘यहां दूल्हा बन कर बैठा है, चल निकल बाहर होली खेलते हैं’। इसके बाद गोपियों ने श्रीकृष्ण के साथ जम कर होली खेली। तभी से भगवान का एक नाम ब्रज दूलह भी पड़ गया। आज भी जब नंदगांव के हुरियारे बरसाने जाते हैं तो राधारानी के मंदिर के बाद ब्रज दूलह के दर्शन करने अवश्य जाते हैं।
उनसे होली खेलने की अनुमति मांगते हैं। भूमियां गली स्थित कटारा हवेली में ब्रज दूलह का छोटा सा मंदिर हैं। सेवायत गोकुलेश कटारा ने बताया कि आज भी ब्रज दूलह की सेवा राधारानी के सखी भाव के चलते बालिकाओं द्वारा की जाती है। कृष्ण स्वरूप पताका लठामार होली शुरू होने से पूर्व यहां लाई जाती हैै।