मथुरा। बदन झुलसा देने वाली गर्मी में जल संकट बढ़ गया है। न सिर्फ तालाब, नहर और रजबहा सूखे पडे़, बल्कि हैंडपंप और टीटीएसपी भी ग्रामीणों की प्यास नहीं बुझा पा रहे हैं। ब्रजवासी बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं। खारे पानी की समस्या से जूझ रही जिले की जनता को राहत देने के लिए प्रशासन भी कदम नहीं उठा रहा है। शहर से लेकर देहात तक लोग पीने के पानी के लिए परेशान हैं। शहर में कोतवाली रोड, भरतपुर गेट, किशन टीला, भैंस बहोरा, दलपत खिड़की, कटौती कुआं, सुभाष नगर आदि क्षेत्रों में लोगों को नगर निगम खारा पानी दे रहा है। लॉकडाउन के दौरान कोई वैकल्पिक व्यवस्था न होने के कारण लोग परेशान हैं।
पानी, पाडल नीमगांव, पानी नायें तीन गांव
गोवर्धन। ‘पाली, पाडल नीमगांव पानी नायें तीन गांव’ कहावत क्षेत्र में खूब प्रचलित है। इन तीन गांवों के अलावा सकीतरा, हरीपुरा, आन्यौर, जतीपुरा, मुड़सेरस, देवसेरस, महरौली आदि गांवों में जलसंकट व्याप्त है। कई गांवों में टैंकर से पानी मंगा रहे हैं। नीमगांव में महिलाएं एक से डेढ़ किलोमीटर दूर से पानी ला रही हैं। गिरिराज जी परिक्रमा में भी पानी की टंकियां जल विहीन पड़ी हैं। कस्बा में दो पानी की टंकियां व ट्यूबवेल पूर्ति नहीं कर पा रहे हैं। दसविसा के तबेला मोहल्ला में 15 दिन से पानी की आपूर्ति बाधित है। समीपवर्ती
निजी टैंकर से खरीद रहे पानी
टैंटीगांव। सुरीर क्षेत्र के गांव परसौतीगढ़ी, नगला मौजी, नगला फोंदा, नगला बरी, टैंटीगांव, सरकोरिया, इरौली गूजर, सामौली, बैकुंठपुर, नगला हरिया, औहावा, जरारा आदि गांवों में लोग पानी के लिए जूझ रहे हैं। यहां खारा पानी होने के कारण महिलाएं व बच्चे कोसों दूर से पैदल पानी ला रहे हैं। कुछ ग्रामीणों ने टैंकरों खरीद लिए हैं। ग्रामीण कर्नल सिंह सिकरवार, तेजवीर सिंह, संतोष कुमार उपमन्यु, संजय रावत, कन्हैया लाल राघव आदि का कहना है कि गर्मी के साथ पानी का संकट कष्टकारी है।
बछगांव में सफेद हाथी की तरह खड़ी टंकी
सौंख। बछगांव में करीब आठ साल पहले बनाई टंकी इस बार भी शुरू नहीं हो सकी है। गांव आजल में कई दिनों से हैंडपंप खराब पड़े हैं। ग्रामीण पानी के लिए भटक रहे हैं। नगला आशा में टीटीएसपी योजना के तहत बनी टंकी काम नहीं कर रही हैं। लोग निजी टैकरों से पानी खरीद रहे हैं। ग्रामीण गोविंद सिंह ने मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत भी की है। गांव तसिया, नगला अक्खा, मल्हू में टैंकर से पानी मंगा रहे हैं।
शहजादपुर-गढ़ाया से कोसों दूर हैंडपंप पर लगती है लाइन
फरह। पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जन्मभूमि से जुड़े इस क्षेत्र में पीने के पानी की गंभीर समस्या है। नगला चंद्रभान, मखदूम, सहजादपुर, जलाल, बिसू, शहजादपुर, गढ़ाया में लोग दूर से पानी भरकर लाते हैं। शाहजादपुर में दो किलोमीटर दूर सडक़ किनारे हैंडपंप से महिलाएं पैदल की धूप में पानी लाने को मजबूर है। यही स्थित गढ़ाया की भी है। यहां भी गांव से दूर हैंडपंप से पानी लोग भरकर लाते हैं।
जिले पेयजल योजनाओं के आंकड़े
जलनिगम - 72 टंकी
ग्राम पंचायतें - 86 टंकी
टीटीएसपी - 750 इकाई
हैंडपंप - 23 हजार
गुजरे वित्तीय वर्ष के दौरान जनपद को नए हैंडपंप के लिए मिलने वाला जनप्रतिनिधि कोटा कोटा हासिल नहीं हुआ है। जल निगम की 72 में से 64 परियोजनाएं जलापूर्ति कर रही हैं। आठ परियोजनाओं को जल्द शुरू करने की कोशिश की जा रही है। कुछ टीटीएसपी और हैंडपंप की मरम्मत ग्राम पंचायतों के स्तर से कराई जा रही है।
- पीके खंडेलवाल, एक्सईएन, जल निगम।