मथुरा। शुक्रवार को यमुना खतरे के निशान से पहली ही ठहर गई। दोपहर 12 बजे के बाद शाम चार बजे तक यमुना का जल स्तर प्रयागघाट पर 165.46 मीटर पर स्थिर हो गया।
इस स्थिति में गोकुल बैराज से आगरा के लिए छोड़े जा रहे पानी की मात्रा भी 65860 क्यूसेक हो गई है। संभावना जताई जा रही है कि अब श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर यमुना के जल स्तर में गिरावट आएगी। वर्तमान स्थिति से मांट तहसील के गांवों में पानी घर कर गया है।
18 अगस्त को यमुना में ताजेवाला से छोड़ा गया 8.28 लाख क्यूसेक पानी मथुरा में प्रयागघाट पर 165.46 मीटर पर पहुंचकर ठहर गया है। मथुरा ही नहीं, ओखला और तालेवाला पर भी यमुनाजल में ठहराव है।
अब यहां से अतिरिक्त पानी और नहीं छोड़ा जाता है तो मांट तहसील और मथुरा-वृंदावन के निचले इलाकों में पहुंचा यमुना का पानी एक दिन बाद फिर उतरते हुए नजर आएगा। वर्तमान स्थिति में बाढ़ से प्रभावित क्षेत्रों का डीएम सर्वज्ञराम मिश्र ने निरीक्षण किया। जयसिंहपुरा में किए गए इंतजामों को देखा।
मांट और महावन में प्रशासन सतर्क, एसडीएम ने किया निरीक्षण
टैंटीगांव/बलदेव (मथुरा)। सुरीर क्षेत्र में यमुना के जलस्तर को देखते हुए यमुना के तटीय गांवों में पुलिस निगरानी में लगी है। यमुना किनारे के गांव सिहावन, नगला नाहरिया, नगला सपेरा, भिदोनी, औहावा, इरोली गूजर, सरकोरिया, सामोली आदि गांवों में गश्त की जा रही है।
बलदेव देहात क्षेत्र के यमुना के समीपवर्ती ग्रामों में भी दहशत है। बाढ़ से फसलों को सबसे अधिक खतरा है। एसडीएम महावन हनुमान प्रसाद मौर्य ने संभावित ग्रामों में दौरा कर स्थिति का जायजा लिया। ग्राम नगला अकोस, लहरौली घाट, मादौर, नगला अर्जुन, गढ़ी गोवर्धन, तलफीगढ़ी, पक्की गढ़ी, नेरा, सेहत, नगला फूलपुर, नगला हगा आदि कई ग्रामों में दहशत है। नायब तहसीलदार पवन पाठक, सीओ महावन जेएस चौहान आदि थे।