बदलते मौसम और बढ़ते प्रदूषण के कारण मासूम बच्चों में सांस की बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। ऐसे में अभिभावकों को अपने नौनिहालों के स्वास्थ्य के प्रति विशेष सतर्कता बरतने की आवश्यकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, छोटे बच्चों में निमोनिया के लक्षण बहुत तेजी से उभरते हैं, जिन्हें यदि समय रहते न पहचाना जाए तो यह जानलेवा साबित हो सकता है।
बच्चों में सांस लेते समय यदि गड़गड़ाहट की आवाज आए, सांस लेने की गति सामान्य से अधिक तेज हो, या सांस खींचते समय सीने और पेट के बीच (पसलियों के नीचे) गहराई या गड्ढा बनता दिखे, तो इसे कतई नजरअंदाज न करें। यह बच्चे को सांस लेने में हो रही गंभीर तकलीफ और निमोनिया का स्पष्ट संकेत हो सकता है।
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. राजेश मिश्रा ने बताया कि 6 वर्ष तक के बच्चों में निमोनिया का संक्रमण बहुत संवेदनशील होता है। यदि बच्चा दूध पीना छोड़ दे, सुस्त हो जाए, उसे तेज बुखार के साथ पसलियां चलने (रिट्रैक्शन) की शिकायत हो, तो तुरंत चिकित्सक से परामर्श लें। घरेलू उपचार में समय गंवाने के बजाय समय पर दिया गया डॉक्टरी इलाज बच्चे की जान बचा सकता है। इसके अलावा उन्हें ठंडी हवा से बचाएं और घर में धुआं या प्रदूषण न होने दें।
तेज सांस चलना: सामान्य से अधिक गति से सांस लेना।
पसलियां चलना: सांस खींचते समय सीने के निचले हिस्से का अंदर धंसना।
सांस में आवाज: सांस लेते या छोड़ते समय गड़गड़ाहट या सीटी जैसी आवाज आना।
सुस्ती और चिड़चिड़ापन: बच्चे का सुस्त होना, लगातार रोना या दूध न पीना।
मौसम में बदलाव के दौरान बच्चों को गर्म कपड़े पहनाकर रखें और लक्षण दिखते ही नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र या बाल रोग विशेषज्ञ से संपर्क करें।