वृंदावन। रसिक शिरोमणि एवं श्रीबांकेबिहारी महाराज के प्रादुर्भावक श्रीस्वामी हरिदास महाराज का 488वां पाटोत्सव रविवार को श्रद्धाभाव के साथ मनाया गया। एक ओर जहां हरिदास महाराज का दिव्य अभिषेक किया गया तो वहीं बांकेबिहारी मंदिर में निकुंज लीला का मंचन किया गया।
श्री हरिदास पीठ मंदिर में पाटोत्सव समारोह का मुख्य आकर्षण श्रीहरिदासजी महाराज का दिव्य महाभिषेक रहा, जो श्रीकेलिमालजु, अष्टादश सिद्धांत पदावलि तथा श्रीराधिका स्तवराज के गायन के बीच संपन्न हुआ। इस दौरान श्रीविग्रह का दूध, दही, घी, शहद, शक्कर, गंगाजल, गुलाबजल, केसर और इत्र से भव्य अभिषेक कर अलौकिक शृंगार किया गया। समारोह का संयोजन आचार्य विप्रांश बल्लभ गोस्वामी ने किया, जिसमें विजयलक्ष्मी गोस्वामी, निवेदिता, प्रवर्तिका समेत सैकड़ों भक्तों ने भाग लिया।
बैनी गूंथन लीला में उमड़ा श्रद्धा का सैलाब
दोपहर में श्रीबांकेबिहारी मंदिर में बैनी गूंथन नामक प्रसिद्ध निकुंज रासलीला का आयोजन हुआ। इस लीला का आयोजन केवल स्वामी हरिदास साधनारम्भ दिवस पर होता है। आचार्य प्रहलाद वल्लभ गोस्वामी ने बताया कि यह लीला ललिता सखी के प्राकट्य प्रसंग पर आधारित है, क्योंकि श्रीस्वामीहरिदासजी को ललितासखी का अवतार माना जाता है। रासलीला में गाया गया बैनी गूंथ कहा कोऊ जाने, मेरी सी तेरी सौं प्यारी ने भक्तों को भावविभोर कर दिया।
भव्य शोभायात्रा से गूंजा वृंदावन
सायंकाल श्रीबांकेबिहारी मंदिर से निधिवनराज तक भव्य शोभायात्रा निकाली गई। इस पारंपरिक सवारी में बैंड, झांकियां, नृत्य मंडलियां व भजन गायकों के समूह सम्मिलित हुए। हजारों श्रद्धालु जयकारे लगाते चल रहे थे। परंपरा है कि इस दिन बांकेबिहारी स्वामी हरिदास जी को निधिवन में बधाई देने के लिए जाते हैं। इसलिए मंदिर में शोभायात्रा निकलती है जो कि निधिवन पर समाप्त हो जाती है।