उत्तर प्रदेश के मथुरा जंक्शन में सुरक्षा की दृष्टि से लगे सीसीटीवी कैमरों की नजर कमजोर (विजिबिलिटी) हो गई है। कुछ कैमरों पर जाले लग गए हैं तो कुछ कैमरे बंद भी हो गए हैं। इस वजह से जंक्शन की सुरक्षा कमजोर पड़ रही है।
जंक्शन की सुरक्षा में लगे कुछ सीसीटीवी कैमरे बंद हो गए हैं। कुछ जाले और लैंस खराब होने की वजह से सही काम नहीं कर पा रहे हैं। कुछ कैमरों की विजिबिलिटी तो एकदम से कम हो गई है। ये कैमरे सही तरह से वीडियो रिकॉर्ड नहीं कर पा रहे हैं। जंक्शन की सुरक्षा व्यवस्था को चाक चौबंद करने के लिए वर्ष 2017 में पूरे परिसर में 90 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए थे।
कैमरों का नियंत्रण आरपीएफ को दिया गया। जंक्शन पर निगरानी के लिए कंट्रोल रूम भी बनाया गया है। समय बीतने के साथ कैमरों के काम करने की क्षमता कम होने लगी है। इसका सीधा असर कैमरों में कैद होने वाली तस्वीरों पर पड़ा है। कैमरों की खराबी कुछ दिन पहले एक वारदात के बाद सामने आई।
चोरी की एक वारदात वेटिंग रूम में घटित हुई। पीड़ित जब जीआरपी टीम को साथ लेकर सीसीटीवी कंट्रोल रूम में पहुंचा तो फुटेज धुंधली नजर आई। पर्स चोरी करने वाले की सही तस्वीर पुलिस और पीड़ित को नहीं दिख पाई। तब चला कि कैमरे का लैंस गड़बड़ हो चुका है। कुछ कैमरों पर धूल जमी हुई मिली। इसे लेकर रेलवे अधिकारियों ने उच्चाधिकारियों को पत्र लिखा।
बताया गया कि सात वर्ष पूर्व लगाए गए सीसीटीवी कैमरों में कुछ कैमरे सही से काम नहीं कर रहे हैं। इसके बाद रेलवे और आरपीएफ अधिकारियों ने कैमरों की गुणवत्ता को परखा। इनमें कुछ कैमरों की गुणवत्ता काफी खराब पाई गई। स्टेशन निदेशक एसके श्रीवास्तव ने बताया कि कैमरों की जांच करवाई गई है। जो कैमरे खराब हालत में हैं। उनके स्थान पर नए कैमरे लगाए जाएंगे।
सीसीटीवी की मदद से जीआरपी ने किए कई खुलासे
सीसीटीवी कैमरा पुलिस के लिए सबसे बड़ा हथियार बना है। सीसीटीवी कैमरा की मदद से पुलिस ने कई वारदात के खुलासा किए हैं। कुछ दिन पहले पुलिस ने एक मोबाइल चोर को सीसीटीवी फुटेज की मदद से गिरफ्तार किया था। यह चोर यात्रियों के पास लेटता था। उनके मोबाइल फोन चोरी कर लेता था। सीसीटीवी से आरोपी की पहचान होने के बाद पुलिस ने उसे जंक्शन से गिरफ्तार किया था।