श्रीबांकेबिहारी मंदिर में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पर्व पर वर्ष में एक बार होने वाली मंगला आरती में इस बार कुछ अलग ही दृश्य देखने को मिला। आरती में केवल 600 लोगों को ही अनुमति दी गई थी। केवल पासधारक ही पहुंचे, लेकिन मंदिर में तमाम पुलिसकर्मी और उनके स्वजन आरती में शामिल हो गए। इसका वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसे देखकर लग रहा है कि आरती के दौरान मंदिर में दो हजार से अधिक लोग मौजूद रहे। भीड़ के कारण खुद अधिकारी भी फंसे हुए नजर आए। उन्हें निकालने के लिए पुलिसकर्मियों को जद्दोजहद करनी पड़ी। फेसबुक पर ब्रजवासी तरह-तरह के कमेंट्स भी लिख रहे हैं। पुलिस प्रशासन के इस रवैये का विरोध भी हो रहा है।
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विदित हो कि जन्माष्टमी के पर्व पर श्रीबांकेबिहारी मंदिर में वर्ष में एक बार मंगला आरती की जाती है। साल 2022 में मंगला आरती में भगदड़ में दो श्रद्धालुओं की मौत और कई लोगों के घायल हो जाने के बाद हाईकोर्ट के आदेश पर मंदिर के संचालन की जिम्मेदारी सिविल जज जूनियर डिवीजन को दे दी। तभी से कोर्ट के आदेश पर सारे कार्य हो रहे थे। पिछले वर्ष कोर्ट ने आरती में 600 लोगों को ही प्रवेश की अनुमति दी थी, जिसमें सेवायत और उनके परिजन भी शामिल थे। इस बार मंदिर की जिम्मेदारी सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर गठित हाईपावर कमेटी पर है। कमेटी के अध्यक्ष हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज अशोक कुमार हैं।
उन्होंने अभी हाल ही मीटिंग कर अधिकारियों से कहा कि इस बार भी 600 लोगों को ही परमिशन दी जाए। इसके लिए सेवायतों ने पास जारी किए। एसपी सिटी और सीओ सदर के ऑफिस से पास बनाए गए, लेकिन मंदिर में आरती के समय अत्यधिक लोग पहुंच गए। पुलिस अधिकारियों से लेकर सिपाहियों तक की भीड़ मंदिर में आरती के दौरान रही। भीड़ भी इतनी अधिक हो गई कि खुद एडीजी आगरा जोन अनुपमा कुलश्रेष्ठ और उनके परिजन भी फंस गए। पुलिसकर्मियों को उन्हें निकालने के लिए जद्दोजहद करनी पड़ी। वहीं भीड़ में फंसकर एक महिला श्रद्धालु की तबीयत अचानक बिगड़ गई।
मंदिर में टूट गई वर्षाें पुरानी परंपरा, नहीं सुनाई गई कथा
जब मंदिर में ठाकुर जी का पर्दे की ओट में अभिषेक और मंगला आरती होती है तो मंदिर के अंदर सेवायत श्रीमद् भागवत कथा में श्रीकृष्ण जन्म का प्रसंग सुनाते हैं, लेकिन इस बार सेवायतों ने ऐसा नहीं किया। मंदिर के उपप्रबंधक उमेश शर्मा ने बताया कि इस बार भी मंदिर के सेवायत ब्रजेश गोस्वामी से कथा सुनाने के लिए कहा गया था, लेकिन उन्होंने कह दिया कि मंदिर में आम श्रद्धालुओं को कथा सुनाई जाती है। जब वह ही नहीं तो कथा किसे सुनाएं।