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किसान के आत्मदाह से गम में डूबा तरौली सुमाली

Fri, 10 Apr 2015 12:00 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला मथुरा
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डामर की सड़कों ने शहर से भले जोड़ दिया हो लेकिन गांव में आज भी सुख बोने और दुख काटने का सिलसिला साथ-साथ चलता है। चौमुंहा के तरौली सुमाली में किसान शिशुपाल के आत्मदाह ने सबको ऐसे झकझोरा कि गांव में चूल्हे नहीं जले। मृतक के घर दिलासा देने वालों की कतार रही। पत्नी का करुण क्रंदन और बच्चों की खामोश सिसकियां हर आने जाने वाले की आंखें नम कर रही थीं। इस गमगीन माहौल में लोग चुप इसलिए भी थे क्योंकि इस परिवार के भविष्य को लेकर कोई जवाब नहीं था। 
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 गुरुवार को जब तरौली सुमाली में अन्य लोगों से बात हुई तो पता चला शिशुपाल ने फसल के लिए कर्ज भी लिया था। इसे चुकाने की उम्मीद फसल से थी जो ओलावृष्टि के कारण बर्बाद हो गई। शायद यही दुख उनके दिमाग पर भारी हो गया और बुधवार को उन्होंने मिट्टी का तेल छिड़ककर आत्मदाह किया।

शिशुपाल के इस कदम का अंदाजा शायद उनकी पत्नी ब्रजलता को भी नहीं था। रोते-रोते उनके मुंह से बस एक ही शब्द निकल रहा है कि अब हमारा क्या होगा। महिलाएं दिलासा दे रही हैं लेकिन सब जानते हैं, बातों के मायने क्या हैं।
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सुबकती आवाज में बड़े बेटे मानवेंद्र्र ने भी बताया कि पापा पर कर्ज था। वो परेशान थे, ये बात मैं जानता था। इसलिए पढ़ाई छोड़ दी, खेतों में काम करने लगा...बस इसके बाद उसके मुंह से भी बोल न फूटे। जबान लड़खड़ा गई। दूसरा बेटा संजू फरह में अपनी नानी के घर था। पिता की मौत का समाचार सुना तो अकेला ही दौड़ा चला आया। बेटे सोनू और बिटिया विमलेश की आंखों में आंसुओं के साथ सवाल हैं कि उनके पापा अब कहां है। वो उनसे कभी मिल पाएंगी या नहीं।


कर दिया था खेत का सौदा
कर्ज में डूबे शिशुपाल की आखिरी उम्मीद खेत में खड़ी फसल थी। वो हरियाणा में मजदूरी करते थे। आत्मदाह करने से पहले भी वे अपने खेत देखकर आए थे। घर में इसे लेकर चर्चा भी की। गांव वालों के अनुसार शिशुपाल पर 12 लाख का कर्ज था जिसे चुकाने के लिए शायद उन्होंने खेत का सौदा भी कर दिया।
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