मथुरा। सभी विषयों के वैज्ञानिकों को एक साथ मिलकर कार्य करना चाहिए। मेडिकल फील्ड हो, वेटरिनरिन अथवा पर्यावरणविद्। पशुओं के मानव जाति में फैलने वाली बीमारियों एवं उनके बचाव के लिए सभी को एकजुट होकर प्रयास करने होंगे। यह विचार आईसीएआर के पूर्व एडीजी एवं पूर्व कुलपति प्रो. गयाप्रसाद ने व्यक्त किए।
वह वेटरनरी विवि में लोक स्वास्थ्य चुनौतियों के परिप्रेक्ष्य में आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि सभी को ईगो छोड़कर मानव हित में एकजुट होना पड़ेगा अन्यथा चीन जैसे परिणाम भुगतने होंगे। विशिष्ट अतिथि आईसीएआर नई दिल्ली के एडीजी (पशु स्वास्थ्य) डॉ. अशोक कुमार ने कहा कि विषाणुओं और जीवाणुओं में एंटीबॉयोटिक के प्रति रोग प्रतिरोधक क्षमता का कारण मात्र पशु नहीं है। इनका अन्य कारण मनुष्यों को दी जाने वाली एंटीबॉयोटिक दवा व वातावरण में परिवर्तन है।
एसोसिएशन अध्यक्ष डॉ. एनआर प्रधान ने गतिविधियों की जानकारी दी। सचिव डॉ. टीके मंडल ने सचिवों और संरक्षक डा. एके परिमानिक को सम्मानित किया। वैज्ञानिकों और छात्रों ने विभिन्न विषयों जैसे मनुष्य स्वास्थ्य, पशुओं को खाद्य गुणवत्ता एवं सुरक्षा के साथ मनुष्यों में पशु जनित खाद्य पदार्थों, दूषित जल एवं वायु जनित रोगों पर सघन चर्चा की। मुख्य अतिथि दुवासु के कुलपति प्रो. जीके सिंह, कॉलेज के अधिष्ठाता प्रो. पीके शुक्ला, आयोजन सचिव डॉ. रश्मि सिंह, डॉ. अजय प्रताप सिंह, डॉ. उदित जैन, डॉ. बरखा शर्मा, डॉ. पारुल, डॉ. मधु तिवारी, डॉ. विजय पांडेय, डॉ. एमएम फारूकी, डॉ. नीरज गंगवार, डॉ. मीना गोस्वामी, डॉ. विकास पाठक, डॉ. सोमेन चौधरी, डॉ. अमिताभ भट्टाचार्य, डॉ. रजनीश सिरोही, डॉ. विक्रांत सूदन, हरीमोहन रावत रहे।
मानव में ये बीमारियां पशुओं से फैलती हैं
पशु-पक्षियों से मानव में फैलने वाली बीमारियों में एंथ्रेक्स, ऑर्विरस, एवियन ऐन्फ्लेंजा, बी मायरस, रेबीज, बु्रसलोसिस, कॉपीलोबेकेरियोसिस, फंगल डिजीज, ब्लू ग्रीन अल्गी, जिंकाडिएसिसि, प्लेग, फ्लू फीवर, रेट बाइट फीवर, रिंग वार्म, सलमोनिलोसिस, टिक फीवर, वेली फीवर, यलो फीवर, जीका वायरस आदि हैं।