विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के प्रयासों से सऊदी अरब में चार माह से बंधक बने गांव भैंसा के वीरेंद्र की सकुशल वापसी हो गई। सोमवार सुबह वह ओमान एयरवेज की फ्लाइट से दिल्ली के इंदिरा गांधी हवाई अड्डे पर उतरे। मथुरा से ममेरे भाई और उसकी रिहाई में जुटी युवाओं की टीम ने उन्हें रिसीव किया।
वीरेंद्र ने बताया कि सऊदी अरब में काम करने के उद्देश्य से गया था, लेकिन वहां काम नहीं, बल्कि जिल्लत भरी जिंदगी मिली। वहां काम करने का मतलब अपना स्वाभिमान और सम्मान गिरवी रखना था। उन्होंने बताया कि मुझ जैसे अनेक भारतीय युवा वहां बंधक बनाकर रखे हैं। जिनका वीजा, पासपोर्ट और सभी कागजात यह लोग वहां पहुंचते ही जब्त कर लेते हैं।
उन्होंने बताया कि काम की तलाश में वहां गए भारतीय युवाओं को बंधुआ मजदूर बनाकर रखा जाता है। काम के नाम कुछ पैसे देने के साथ खाने में मांसाहार दिया जाता है। रोते हुए वीरेंद्र ने बताया कि सऊदी अरब में पहुंचकर काम करना मेरी जिंदगी की सबसे बड़ी भूल थी। मुझे मांसाहार खाने के लिए मजबूर किया गया, लेकिन मैंने सूखी रोटी खाकर एक-एक दिन कष्ट में बिताए।
वीरेंद्र ने बताया कि जिस तरह से मेरे मामले में भारत सरकार ने पहल की है, यदि सरकार आगे भी ऐसे ही प्रयास करे तो और भी भारतीय युवा अपने वतन वापस लौटकर आ सकते हैं। वीरेंद्र ने बताया कि मई 2016 में सऊदी अरब में नौकरी दिलाने के बहाने से कुछ कबूतरबाज उन्हें अपने साथ सऊदी अरब ले गए और वहां बंधक बनाकर रखा।
19 मई को हुए थे रवाना
इंडो पावर एजेंसी, मुंबई के माध्यम से गांव भैंसा के वीरेंद्र 19 मई को सऊदी अरब के शहर जुबैल के लिए रवाना हुए। यहां पहुंचने पर उन्हें नौकरी नहीं मिली। 15 दिन तक खाना-पीना दिया गया। एक माह गुजरने पर वीरेंद्र ने सख्त लहजे में कहा तो उनका खाना-पीना बंद कर दिया। खाने के बजाए नॉनवेज देने लगे तो उन्होंने खाने से इंकार कर दिया।
सूखी रोटी खाकर गुजारा करने लगे। वीरेंद्र ने 20 अगस्त को परिवारीजनों से बात करके आपबीती बताई। बंधक बनाने की खबर पर हरकत में आए परिवारीजनों ने एसएसपी बबलू कुमार से गुहार लगाई। एसएसपी और मथुरा के युवाओं की टीम ने विदेश मंत्री के समक्ष मामला रखा। सभी के प्रयासों से सोमवार को वह परिवार के बीच में पहुंच गए।