मथुरा। पर्यावरण संरक्षण के लिए होली गेट निवासी रुपल नारी शक्ति की मिसाल हैं। वह 25 साल से कपड़े के बैग बनाकर मथुरा-वृंदावन समेत देहात क्षेत्र में आपूर्ति कर रहीं हैं। ताकि प्लास्टिक बैग से छुटकारा मिल सके। वह पर्यावरण संरक्षण के लिए अनूठी पहल चला रहीं हैं। होली गेट स्थित अंतापाडा की रहने वालीं रुपल अग्रवाल ने बताया है कि वर्तमान में पर्यावरण संरक्षण में सबसे बड़ी चुनौतियों में प्लास्टिक शामिल है। क्योंकि यह एक ऐसा पदार्थ है, जो कई सालों तक अस्तित्व में बना रहता है। धरती के भूगर्भ में पहुंचने पर यह मिट्टी की गुणवत्ता को नुकसान देता है, तो दूसरी तरफ नदी, समुद्र या जलाशयों में पहुंचने पर यह जलीय जीवों को नुकसान पहुंचाता है। लोगों के लिए भी घातक होती है।
इसी को देखते हुए उन्होंने व उनके पति ने वर्ष 2000 में प्लास्टिक बैग जैसे कपड़े के बैग बनाना शुरू किया था। ताकि पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिल सके। 25 साल के सफर के बाद उनके यहां वर्तमान में कपड़े के अलग-अलग कीमत के बैग हैं। उनके घर पर ही ये बैग बनाए जाते हैं। इसके लिए उन्होंने एक छोटे कमरे में दो कारीगर बैगों को मांग के हिसाब से बनाते हैं। वर्तमान में सबसे सस्ता 70 रुपये का और सबसे मंहगा 500 रुपये तक की कीमत में बैग उपलब्ध है। ऑर्डर और मांग के आधार पर बैगों की डिजाइन तय की जाती है।
भविष्य में 20 रुपये कीमत के बैग बनाने की है योजना
उन्होंने बताया है कि बरसाना, फरह, गोवर्धन और वृंदावन समेत अन्य क्षेत्रों में उनके यहां से बैग जाते हैं। बड़े-बड़े कारोबारी उनके ऑर्डर पर बैगों को तैयार भी कराते हैं। वह प्रत्येक ग्राहक को प्लास्टिक बैग का इस्तेमाल न करने की सलाह भी दे रही हैं। साथ ही पर्यावरण के प्रति जागरूक भी करती हैं। ताकि पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिल सके। 2018 में पति की मृत्यु के बाद वह अकेली ही काम संभाल रही हैं। उनका बेटा भी बीच-बीच में हाथ बंटाता रहता है। उन्होंने बताया है कि भविष्य में वह सूती कपड़े से कम से कम 20 रुपये की कीमत के बैग बनाने की योजना है। फिलहाल इसपर विचार किया जा रहा है। जल्दी ही इस तरह के बैग बनाए जाएंगे।