परिजन का कहना था कि अगर पुलिस ने गंभीर चोटों के बाद भी आरोपियों को छोड़ दिया। करीब एक घंटे तक हंगामा चलता रहा। सूचना पर पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचे। सीओ अनिल कुमार ने आरोपियों के खिलाफ एफआईआर के बाद गिरफ्तारी का आश्वासन दिया। इस मामले में ताऊ और उसके तीन बेटों सहित छह लोगों के खिलाफ नामजद केस दर्ज किया गया है। एसपीआरए सुरेशचंद्र रावत ने बताया कि हमलावरों की तलाश की जा रही है।
सीआईएसएफ में जाने की तैयारी कर रहा था अवनीश, परिजन बेहाल
पिता ने बताया कि अवनीश फौज में जाना चाहता था। वह सीआईएसएफ की तैयारी कर रहा था। रोजाना दौड़ लगाने जाता था। बड़े भाई के लड़के उससे रंजिश मानने लगे थे। बजड़े बेटे विपिन का पुलिस में चयन होने से उनकी जलन और बढ़ गई थी। इसी खुन्नस में उन्होंने होनहार की जान ले ली। उनके अरमान अधूरे रह गए। अवनीश की मौत से मां सदमे में आ गई। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। ग्रामीण किसी तरह परिजनों को संभाल रहे थे।
देहात में पुलिस निष्क्रिय, सप्ताह में दूसरी घटना
ग्रामीण अंचल में पुलिस की लचर कार्रवाई से पीड़ित एक सप्ताह के भीतर दूसरी मौत है। इसके पहले बलदेव के गांव नेरा के रहने वाले दीपक ने पुलिस की लचर कार्रवाई से परेशान होकर फंदे पर लटक कर जान दे दी थी। दीपक की दो माह पहले बाइक चोरी हो गई थी। लेकिन बरौली चौकी प्रभारी ने पहले तो रिपोर्ट ही दर्ज नहीं की। बाद में तीन युवकों के खिलाफ नामजद रिपोर्ट दर्ज करने के बाद भी उन्हें गिरफ्तार नहीं किया। तीनों दीपक को धमका रहे थे। इसी से आहत होकर उसने जान दे दी। अभी तक चौकी इंचार्ज के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई है। इसी तरह की नायाब पुलिसिंग का नमूना राधाकुंड के नगला सांखी में देखने को मिला। भतीजे को मरणासन्न करने वाले ताऊ और उसके बेटों का महज शांति भंग में चालान किया गया, जबकि उसके गंभीर चोटें थीं। जानलेवा हमले का मुकदमा दर्ज किया जाना था। यही कारण है कि एसएसपी के पास सबसे ज्यादा देहात से फरियादी पहुंच रहे हैं।
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