सौतेली मां और उसके बेटे की हत्या कर शव बोरे में भरकर सड़क किनारे फेंकने वाले सौतेले बेटे और उसके दोस्त को एडीजे स्पेशल ईसी कोर्ट डॉ. पल्लवी अग्रवाल ने बृहस्पतिवार को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। दोनों पर कोर्ट ने 55-55 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। जबकि शव छिपाने में सहयोग करने वाले को 5 साल की जेल तथा 5 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है।
जमुनापार थाना क्षेत्र स्थित गौसना टीले के पास 24 मई 2018 की सुबह सड़क किनारे बोरे में महिला और युवक का शव मिला था। शवों की पहचान शिवनगर कॉलोनी तैयापुर निवासी आशा कुमारी ने अपनी मां देवी पत्नी स्व. रूमाली लाल और भाई राहुल के रूप में की थी। आशा ने पुलिस को बताया था कि उसकी मां रूमाली लाल की दूसरी पत्नी थीं।
पिता सरकारी कर्मचारी थे। इस नाते मां को उनकी पेंशन मिलती थी। पेंशन को लेकर पहली पत्नी का बेटा कृष्णा उर्फ लल्लू उर्फ केके अक्सर झगड़ा करता था। पुलिस ने नामजद कृष्णा, सहयोगी तैयापुर की शिवनगर कॉलोनी निवासी छगनलाल, अलीगढ़ के इगलास निवासी राजकुमार को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया था। यहां से सभी को जेल भेज दिया था।
मुकदमे की सुनवाई एडीजे स्पेशल ईसी कोर्ट डा. पल्लवी अग्रवाल की अदालत में हुई। कोर्ट में 11 नवंबर को तीनों पर दोष सिद्ध हो गया। सजा की बिंदु पर बृहस्पतिवार को सजा सुनवाई हुई। कोर्ट ने कृष्णा उर्फ लल्लू उर्फ केके और छगनलाल को हत्या कर शव छिपाने के मामले में आजीवन कारावास और 55-55 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है।
जबकि शव छिपाने में सहयोग करने वाले राजकुमार को अदालत ने 5 वर्ष के कारावास और 5 हजार रुपये अर्थदंड से दंडित किया है। कोर्ट के आदेश के बाद सभी को जिला कारागार भेज दिया।