मथुरा। कान्हा की नगरी मथुरा-वृंदावन में पहुंचकर आध्यात्मिक ऊर्जा और सांस्कृतिक भव्यता के साथ ही आधुनिक सुविधाओं ने पर्यटकों का रुझान बढ़ाया है। ब्रज में आने वाले पर्यटकों की संख्या में दिनोंदिन इजाफा हो रहा है। ब्रज तीर्थ विकास परिषद ने ब्रज के प्राचीन स्थलों की सूरत बदल डाली है। यही कारण है कि श्रद्धालुओं को यहां दिव्यता का अनुभव हो रहा है।
वर्ष 2017 में सत्ता संभालते ही प्रदेश सरकार ने ब्रज के सर्वांगीण विकास के लिए उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद का गठन किया, जो इस क्षेत्र के कायाकल्प का मुख्य आधार बनी। आज कुसुम सरोवर, राधा कुंड, मानसी गंगा और नारद कुंड जैसे प्राचीन उपेक्षित स्थल अपने असली वैभव में लौट आए हैं। वहां बने पक्के घाट, सफाई व्यवस्था और अत्याधुनिक लाइट एंड साउंड शो पर्यटकों को एक दिव्य अनुभव प्रदान कर रहे हैं।
हाईवे और एक्सप्रेस-वे से मथुरा की कनेक्टिविटी शानदार हुई है। बरसाना में श्री लाडली जी (राधा रानी) मंदिर तक बुजुर्गों और दिव्यांगों के लिए रोप-वे की शुरुआत एक बड़ी राहत है। जिलाधिकारी चंद्र प्रकाश सिंह ने बताया कि मथुरा- वृंदावन को स्मार्ट सिटी बनाया जा रहा है, जिसमें अंडरग्राउंड डक्ट, वायरिंग और सीसीटीवी का मजबूत नेटवर्क शामिल है। काशी विश्वनाथ की तर्ज पर प्रस्तावित बांके बिहारी मंदिर कॉरिडोर भविष्य में दर्शन को और भी सुरक्षित और सुगम बनाएगा।
पर्यटन में रिकॉर्ड उछाल, 1.6 करोड़ से 10 करोड़ पहुंचे श्रद्धालु
जहां 2019 में मथुरा आने वाले पर्यटकों की संख्या महज 1.6 करोड़ थी, वह 2025 में 10 करोड़ का ऐतिहासिक आंकड़ा पार कर गई है। सरकार ने ब्रज की होली को ''रंगोत्सव'' का रूप देकर कुंभ जैसी वैश्विक पहचान दी है। हाल ही में बांके बिहारी मंदिर में महज 15 दिनों में (25 फरवरी से 10 मार्च तक) 45 लाख श्रद्धालुओं का दर्शन करना और 51 लाख से अधिक लोगों का लाइव स्ट्रीमिंग से जुड़ना साबित करता है कि ब्रज अब देश का सबसे बड़ा धार्मिक पर्यटन केंद्र है।
पर्यटन में आए इस उछाल ने मथुरा के होटल, हस्तशिल्प (कंठी माला, ठाकुर जी की पोशाक) और प्रसिद्ध पेड़ा उद्योग को नई गति दी है, जिससे स्थानीय रोजगार पैदा हुए हैं। वहीं सांस्कृतिक विरासत को सहेजने के लिए वृंदावन में गीता शोध संस्थान एवं रासलीला अकादमी की स्थापना की गई है। लुप्त हो रही ''सांझी कला'' को ''सांझी महोत्सव'' के जरिए युवा पीढ़ी तक पहुंचाया जा रहा है। साथ ही प्रदूषण मुक्त ब्रज के लिए इलेक्ट्रिक बसों का संचालन और यमुना घाटों की सफाई सुनिश्चित की जा रही है।