रंगीली नवीली, छबीली, सजीली नजर आ रही है। चूड़ियों की खन-खन और पाजेब की छन-छन मन को झनका रही है। महावर की लाली गाढ़ी प्रीत झलका रही है, मेहंदी से भी मोहना की खुशबू आ रही है। ये सुहागिनें आज सिर्फ श्यामा की सखियां हैं जो अपने श्याम को फाग खेलने के लिए टेर रही हैं। या यूं कहिए कि इनके रूप में स्वयं किशोरी ही कान्हा से फाग खेलेंगीं। नवमी की उस नवरंग तिथि से मिलने के लिए रात मंगल गीत गा रही है।
यह तैयारी आज शाम होने वाली लठामार की है। हुरियारिनें लहंगा ओढ़नी पहन सोलह सिंगार कर अपने-अपने घरों से श्याम संग होली खेलने निकलेंगी। गुरुवार की रात में हुरियारिनों ने हाथों में मेहंदी और पांवों में महावर रचाई। लट्ठ भी तैयार कर लिए हैं। नई नवेली बहुएं पहली होली को लेकर बहुत उत्साहित हैं।
दोपहर तीन बजे नंदगांव के ग्वाल बाल धोती बगलबंदी पहन सिर पर पाग सजाकर ढाल लिए बरसाना पहुंचेंगे। यहां का गोस्वामी समाज प्रिया कुंड पर उनका ठंडाई से स्वागत करेगा। इसके बाद सभी लाड़िली जी मंदिर में पहुंचेंगे। वहां हुरियारों को रंग में तर किया जाएगा। नंदगांव और बरसाने के गोस्वामी मिलकर समाज गायन करेंगे।
पांच बजे के आसपास मंदिर की सीढ़ियों से होरी का हल्ला मचाते मदमाते हुरियारे सारी रंगीली गली को घेर लेंगे। कोई रसिया गाएगा तो कोई गारी, भाभी से होली खेलने की मनुहार होगी। उसके बाद घूंघट में चेहरा छिपाती, लजाती, मुस्काती सखियां हाथों में लट्ठ लिए आएंगी और नेह का निर्झर बहाएंगी। श्याम श्याम के भाव से दोनों पक्ष होली खेलेंगे। इस अलौकिक होली के दर्शन को रसिकों का मेला लगेगा।