वृंदावन। वृंदावन शोध संस्थान में आयोजित ब्रजोत्सव में आचार्य श्रीवत्स गोस्वामी ने कहा कि वृंदा देवी की कृपा से ही साधक जन राधाकृष्ण की लीलाओं से साक्षात्कार करने में समर्थ होते हैं। वृंदा देवी मनोकामना पूर्ण करने वाली देवी हैं। ब्रज के साधकों ने वृंदा देवी से जुड़े संदर्भों को बहुविधि रेखांकित किया है।
इस अवसर पर आयोजित कार्यशाला में डाॅ. चंद्रप्रकाश शर्मा ने बताया कि वैष्णव संप्रदायों ने वृंदा देवी को भगवदीय स्वरूप माना है। वृंदा देवी के कई मंदिर वृंदावन में थे। वर्तमान में वृंदा देवी का मंदिर कामा में है। डाॅ. गोविंद कृष्ण पाठक ने कहा कि वृंदा देवी को लेकर ब्रजभाषा में प्रचुर साहित्य की रचना की गई है। डॉ. इंदु राव ने कहा कि वृंदावन को पृथ्वी का बैकुंठ कहा गया है। इससे पूर्व कार्यक्रम का शुभारंभ वैदिक यात्रा गुरूकुल के छात्रों द्वारा स्वस्ति वाचन से हुआ। संस्थान के निदेशक डॉ. राजीव द्विवेदी ने कहा कि संस्थान द्वारा ब्रज की परंपराओं के संरक्षण एवं संवर्द्धन के लिए ब्रजोत्सव मनाया गया है। कंठी माला प्रशिक्षण कार्यशाला में वनमाली दास एवं ममता ने विद्यार्थियों को विभिन्न वैष्णव संप्रदाय की कंठी की विशेषताओं से अवगत कराया। पद्मावती द्विवेदी ने विद्यार्थियों को ब्रज की वृक्ष संपदा से अवगत कराया। इस अवसर पर सुमनकांत पालीवाल, मनोज मोहन शास्त्री, डाॅ. राजेश शर्मा, ममता गौतम, नामदेवी, ब्रजभूषण चतुर्वेदी, डाॅ. राजेंद्रकृष्ण अग्रवाल समेत अन्य उपस्थित रहे।