नौहझील/मथुरा। गांव मकरंदगढ़ी में पत्नी भावना की गला रेतकर हत्या के आरोपी सिविल इंजीनियर उमेश की गिरफ्तारी के लिए पुलिस ने पूरी ताकत झोंक दी है। वारदात के बाद से ही आरोपी पुलिस को छकाने के लिए लगातार अपनी लोकेशन बदल रहा है। पुलिस की तीन टीमें परछाईं की तरह उसके पीछे लगी हुई हैं।
हत्यारोपी की धरपकड़ के लिए पुलिस ने मथुरा, वृंदावन, दिल्ली और नोएडा सहित करीब दो दर्जन संभावित ठिकानों पर दबिश दी। पेशे से इंजीनियर कानून के फंदे से बचने के लिए लगातार अपनी जगह बदल रहा है। पुलिस भी तकनीक के सहारे उसके पीछे लगी है। उमेश के भागने के मार्ग का पता लगाने के लिए पुलिस ने नौहझील क्षेत्र से लेकर जिले से लगतीं पड़ोसी राज्यों की सीमाओं और हाईवे से जुड़े सैकड़ों सीसीटीवी कैमरों की फुटेज को खंगाला है। कैमरों की मदद से पुलिस को आरोपी के संबंध में अहम सुराग हाथ लगे हैं। पुलिस की सर्विलांस टीम भी हत्यारोपी का मोबाइल नंबर ट्रेस कर रही है।
इधर पोस्टमार्टम के बाद भावना का शव मंगलवार शाम गांव पहुंचा। घर के आंगन से लेकर गांव की गलियों तक सिसकियां सुनाई दे रहीं थीं। शाम करीब सात बजे भावना का अंतिम संस्कार किया गया। जिस संस्कारी बहू ने पूरे घर को संजोकर रखा था, उसे इस तरह दुनिया से रुखसत होते देख हर ग्रामीण की आंखें नम थीं। शमशान घाट पर भावना के बेटे अभिषेक और देवर सुनील ने चिता को मुखाग्नि दी। मां के शव के आगे खड़े होकर अभिषेक और छोटा भाई लड्डू फफक-फफक कर रो पड़े। बच्चे बार-बार अपनी मां को पुकार रहे थे। इस दृश्य को देखकर वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम थीं। एसपी देहात सुरेश चंद्र रावत ने बताया कि पुलिस की तीन टीमें हत्यारोपी की तलाश में जुटी हैं।
रात 3 बजे भट्ठे पर दिखा था उमेश
ग्रामीणों के मुताबिक वारदात को अंजाम देने के बाद हत्यारोपी उमेश को सोमवार की देररात करीब तीन बजे क्षेत्र के ही एक ईंट-भट्ठे के पास देखा गया था। उस वक्त उसके चेहरे पर पत्नी की हत्या का न तो कोई मलाल दिख रहा था और न ही कोई घबराहट। भट्ठे के पास मौजूद लोगों ने बताया कि उमेश नशे का आदी था, इसलिए रात के वक्त उसे वहां घूमता देख किसी को कोई शक नहीं हुआ। लोगों को लगा कि वह रोज की तरह नशे की हालत में घूम रहा होगा। इसी वजह से किसी ने उस पर गौर नहीं किया। सुबह होते ही जब गांव में भावना की हत्या की खबर फैली, तो ईंट भट्ठे पर उमेश को देखने वाले लोगों के होश उड़ गए।
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खिलौनों की आस में दरवाजे को निहार रहे बच्चे
नौहझील। गांव मकरंदगढ़ी में भावना का शव पंचतत्व में विलीन हो चुका है लेकिन घर में रहने वाले उसके दो बच्चे अभिषेक और लड्डू की दुनिया जैसे ठहर गई है। मां को याद कर बिलख रहे ये बच्चे हर आने-जाने वाले से बस एक ही सवाल पूछ रहे हैं, हमारी मम्मी कहां गई हैं।बच्चों के इस चुभते हुए सवाल पर परिजन उन्हें बहलाने के लिए कह रहे हैं कि तुम्हारी मम्मी बाजार से खाने की चीजें लेने गई हैं। इस पर बच्चों ने सुबकते हुए अम्मा-बाबा से सवाल दागा, कहा कि-मम्मी अकेले क्यों गईं, हमें अपने साथ क्यों नहीं ले गईं। कब तक वापस आएंगी।
इधर बुढ़ापे में अपनी लाडली बहू को खो चुके ससुर दलवीर सिंह और सास मछला देवी कांपती आवाज में मासूमों के सिर पर हाथ फेर उन्हें दिलासा दे रहे हैं कि, बेटा वो जल्द ही वापस आएंगी। वो तुम्हारे लिए बहुत सारी खाने की चीजें लेकर आ रही हैं। बाजार से तुम्हारे लिए सुंदर-सुंदर खिलौने भी लाएगी, फिर तुम दोनों भाई खूब खेलना। दादी की बात सुनकर बच्चे दरवाजे पर टकटकी लगाए बैठे रहे। अचानक उन्हें कुछ याद आया और उन्होंने फिर पूछ लिया, पापा भी तो घर पर नहीं दिख रहे, वो कहां गए हैं। बच्चों के इस प्रश्न का उत्तर देना पूरे परिवार के लिए असहनीय हो गया है। कोई भी बच्चों को सच बताने की स्थिति में नहीं है। संवाद