आगरा- दिल्ली हाईवे पर स्थित छाता शुगर मिल के सामने ईंटों से लदी ट्रैक्टर-ट्रॉली में पीछे से कैंटर ने टक्कर मार दी। हादसे में दो भाइयों समेत तीन की मौत हो गई। रविवार सुबह छह बजे हुई इस हादसे की वजह कैंटर चालक को झपकी आना बताया जा रहा है।
छाता कोतवाली प्रभारी संजय कुमार त्यागी ने बताया कि छाता शुगर मिल के सामने मथुरा की ओर जा रहे ईंटों से भरी ट्रैक्टर-ट्राली में पीछे से कैंटर ने टक्कर मार दी। इस दौरान तेज आवाज से आसपास के दुकानदार सिहर उठे। दुर्घटना में ट्रैक्टर चालक हरियाणा के थाना होडल स्थित भुलवाना गांव निवासी पूरन (43 ), बरसाना के सहार निवासी मजदूर उमेश (37), आजमगढ़ के थाना कंधरापुर के कपसा निवासी कैंटर चालक प्रिंस सिंह (26) और दिल्ली के महिपालपुर निवासी कैंटर के खलासी धर्मेंद्र यादव गंभीर रूप से घायल हो गए। सूचना पर पुलिस और एनएचएआई के घटना प्रबंधक अधिकारी आवेश खान अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे।
पुलिस के अनुसार, उमेश और कैंटर चालक प्रिंस की मौके पर ही मौत हो गई। गंभीर रूप से घायल ट्रैक्टर चालक पूरन की अस्पताल ले जाते समय रास्ते में मौत हो गई। पुलिस ने गंभीर रूप से घायल कैंटर के खलासी धर्मेंद्र को उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया है। पोस्टमार्टम हाउस पर पूरन के छोटे भाई कैलाश ने बताया कि हादसे में पूरन और मामा के बेटे उमेश की जान चली गई। उमेश अपने परिवार में अकेला था। उनके माता पिता की पहले मृत्यु हो चुकी है।
आधा घंटे तक राष्ट्रीय राजमार्ग पर लगा रहा जाम
दुर्घटना के बाद राष्ट्रीय राजमार्ग पर आधे घंटे तक वाहनों का आवागमन बाधित रहा। पुलिस और एनएचएआई की टीम ने राष्ट्रीय राजमार्ग से ईंटों को हटवाकर और वाहनों को किनारे कराकर आवागमन सुचारू कराया। इस दौरान करीब आधे घंटे तक हाईवे पर जाम लगा रहा।
भाई से मिलने की चाह रह गई अधूरी
छाता में दुर्घटना में मृत कैंटर चालक प्रिंस अपने परिवार में सबसे छोटा था। पोस्टमार्टम गृह पर आई गुरुग्राम निवासी बहन गुडि़या ने बताया कि चार भाई बहनों में वह सबसे छोटे थे। रविवार को वह गुरुग्राम उससे मिलने के लिए आने वाले थे। रात को उनकी मोबाइल फोन पर बात भी हुई थी। फोन पर हुई बातचीत में उन्होंने कहा था कि वह सुबह घर पहुंच जाएंगे। अपने मामा से मिलने के लिए भांजे की काफी उत्साहित थे, लेकिन मामा के पहुंचने के स्थान पर उनकी मौत की खबर पहुंच गई।