मथुरा। जनवरी माह के आखिरी सप्ताह में दिन में 10 से 15 डिग्री सेल्सियस तापमान इंसानों को भले ही अखर रहा हो, लेकिन खेती के लिहाज से ये सर्दी बेहद मुफीद बताई जा रही है। खासतौर से गेहूं और जौ के पकाव पर इसका सर्वाधित अच्छा असर बताया जा रहा है।
मौसम को देखते हुए गेहूं किसानों के चेहरे खिले हुए हैं। उनका मानना है कि इस बार गेहूं की अच्छी पैदावार होगी, क्योंकि अनुकूल तापमान होने के कारण फसल पोषकतत्वों को भलीभांति ग्रहण कर सकेगी।
इस समय बरसात से आलू की फसल को नुकसान हो सकता है, क्योंकि अधिकतर किसान जरूरत के हिसाब से पहले ही पानी लगा चुके हैं। अब बारिश होने के बाद यदि तेज धूप निकलती है तो आलू की फसल में बीमारी का प्रकोप हो सकता है।
जिले में फसलों का रकबा
-गेहूं दो लाख हेक्टेयर
-सरसों 45 हजार हेक्टेयर
-जौ 20 हजार हेक्टेयर
इस समय यह सर्दी गेहूं की फसल के लिए रामबाण है। इससे फसल का अच्छा पकाव होगा और पैदावार बढ़ेगी।
- कमलेश भगत, किसान
कई साल बाद जनवरी माह के आखिरी सप्ताह में इतनी सर्दी पड़ी है। इससे खेती को खासा लाभ हुआ है।
-विनोद, किसान
ये सर्दी गेहूं, जौ और सरसों की फसल के लिए खासी लाभकारी है। जनवरी माह में हल्की बरसात ने सोने पर सुहागा का कार्य किया है।
- डा. श्याम सुंदर शर्मा, कृषि वैज्ञानिक राया शोध केंद्र
ये सर्दी खेती के लिए काफी लाभदायक है। रबी की गेहूं, जौ और सरसों के लिए ये आदर्श मौसम कहा जा सकता है। इससे गुणवत्ता और पैदावार दोनोें ही बेहतर होंगे।
- डा. प्रमोद कुमार, जिला कृषि अधिकारी मथुरा