मथुरा। किसान के जलने के बाद राजस्व टीम पर सवाल खड़े हो गए हैं। बताया जा रहा है कि राजस्व की टीम खांडसारी सहकारी समिति के अधिकारियों के बिना बताए ही जमीन खाली कराने पहुंची थी, जबकि यह जमीन खांडसारी सहकारी समिति की है। हालांकि इसकी जांच हो रही है।
अधिकारियों के मुताबिक, गांव खुशीपुरा में खांडसारी सहकारी समिति की करीब पांच बिस्वा जमीन बताई जा रही है। करीब 30 साल से सत्यभान का परिवार इस जमीन का उपयोग कर रहा है। गांव के कुछ लोगों की भी इस जमीन पर नजर है। एक अधिकारियों के अनुसार कुछ लोग इस जमीन को सत्यभान को ही करीब चार हजार रुपये वर्गगज में बेचना चाहते थे। इसलिए वह राजस्व टीम के साथ मिलकर इस जमीन को खाली कराने प्रयास कर रहे थे।
यही कारण रहा कि जमीन खाली कराने सिर्फ राजस्व की टीम पहुंची, लेकिन कार्रवाई के समय खांडसारी सहकारी समिति के अधिकारियों को शामिल नहीं किया गया। ऐसे में राजस्व टीम पर सवाल खड़े हो गए हैं। हालांकि डीएम ने प्रकरण की गहनता से जांच के लिए एडीएम डॉ. पंकज कुमार वर्मा को जिम्मेदारी दी है। वह घटना के बाद एसडीएम सदर अभिनव जे जैन के साथ गांव के लोगों के भी बयान दर्ज करने के लिए पहुंचे। यहां उन्होंने कुछ ग्रामीणों के बयान लिए हैं।
एडीएम एफआर का कहना है कि फिलहाल मामले की जांच हो रही है। प्रत्येक तथ्य को बारीकी से परखा जा रहा है। जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे उसी के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी। इधर, घटना के बाद जमीन पर बनी झोपड़ी में भी आग लगने की चर्चा रही। कुछ ग्रामीणों का कहना है कि झोपड़ी में आग लगने के बाद ही किसान चपेट में आ गए थे। हालांकि अधिकारी इससे इन्कार कर रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि वहां झोपड़ी में कोई आग नहीं लगी है।