चुनरी मनोरथ के बाद घाट पर घटे सिंधी समाज के लोग।
मथुरा। भगवान झूलेलाल के अनुयायियों ने आस्था और श्रद्धा के साथ श्रीयमुना महारानी को चुनरी ओढ़ाई। सिंधी जनरल पंचायत के तृतीय चुनरी मनोरथ में पदाधिकारियों और सदस्यों ने परिवार सहित 91 साड़ियों से तैयार 525 मीटर लंबी चुनरी यमुना महारानी को ओढ़ाई।
मीडिया प्रभारी किशोर इसरानी ने बताया कि लाला नवल किशोर नलकूप स्थित भिवानी धर्मशाला से गाजेबाजे के साथ कलश यात्रा प्रारंभ हुई। 15 नौकाओं में बैठे श्रद्धालुओं ने भजन-कीर्तन करते हुए यमुना महारानी को एक पार से दूसरे पार तक चुनरी ओढ़ाई। इस दौरान सतीघाट श्रद्धा, भक्ति और सिंधी संस्कृति के रंगों से सराबोर नजर आया।
अध्यक्ष नारायण दास लखवानी ने कहा कि सिंधी समाज जल का उपासक है। इसी आस्था के तहत यमुना महारानी का चुनरी मनोरथ किया है। वरिष्ठ उपाध्यक्ष रामचंद्र खत्री ने बताया कि मथुरा में सिंधी समाज यमुना महारानी को दरिया शाह मानते हुए वरुणावतार भगवान झूलेलाल के स्वरूप में पूजता है। उपाध्यक्ष जीवतराम चंदानी और प्रदीप उकरानी ने बताया कि सिंधी समाज के इष्ट देव वरुणावतार भगवान झूलेलाल को जल देवता भी कहा जाता है। कन्हैयालाल ने कहा कि चुनरी मनोरथ समाज को जोड़ने का माध्यम है। इस दौरान महामंत्री बसंत मंगलानी, प्रदीप उकरानी, सुरेश मेठवानी, जितेंद्र लालवानी, रमेश नाथानी, अशोक अंदानी, सुंदर खत्री, चंदनलाल आडवानी, झामनदास नाथानी, सुदामा खत्री आदि मौजूद रहे।