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UP: कृष्ण नगरी में बड़े आंदोलन की चिंगारी...धर्म संसद की पटकथा हुई तैयार; उठेगा राम मंदिर निर्माण जैसा मुद्दा

Fri, 15 Nov 2024 01:09 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो अमित मुद्गल, मथुरा

सार

भगवान कृष्ण की नगरी से एक ऐसे आंदोलन की चिंगारी धीमे-धीमे सुलग रही है, जो एक बड़े मुद्दे का रूप लेगी। ये मुद्दा उसी स्तर पर पहुंचाने पर जोर रहेगा, जिस स्तर पर  राम मंदिर निर्माण का मुद्दा पहुंचा था।
 
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कृष्ण जन्मभूमि मंदिर, मथुरा - फोटो : istock
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विस्तार
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मथुरा में आरएसएस का दस दिवसीय शिविर आयोजित होने के बाद यहां होने जा रही धर्म संसद की तैयारियों का अंदाज ही बदल गया है। कृष्ण की नगरी में एक बड़े आंदोलन की चिंगारी आहिस्ता आहिस्ता सुलग रही है। दरअसल, अब इस मुद्दे को धर्म संसद उस स्तर तक ले जाना चाहती है जिस स्तर तक अयोध्या में राम मंदिर निर्माण का मुद्दा पहुंचा था।
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यही कारण है कि देश-विदेश के सभी साधु-संतों एवं विद्वजन से इस बाबत संपर्क साधा जा रहा है। आरएसएस के शिविर में भी इस मुद्दे की चर्चा होने के बाद इसकी तैयारियों को और धार दी गई है।वृंदावन के केशव धाम में 27 नवंबर को अंतरराष्ट्रीय धर्म संसद का आयोजन होने जा रहा है। श्रीकृष्ण जन्मभूमि विवाद का हिंदू पक्ष की और से मुकदमा लड़ रहे श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति न्यास के अध्यक्ष महेंद्र प्रताप सिंह एडवोकेट ने यह धर्म संसद बुलाई है।

अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के बाद से ही मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मस्थान पर भी भव्य मंदिर बनाने की मांग जोर पकड़ने लगी है। हालांकि श्रीकृष्ण जन्मभूमि एवं शाही ईदगाह मस्जिद का यह विवाद कोर्ट में विचाराधीन है पर भावनात्मक मुद्दे पर भी इस आंदोलन को तेज करने की पूरी तैयारी हो चुकी है। इसी चिंतन-मनन करने के लिए देश-विदेश के हिंदू, सिख, बौद्ध और जैन धर्म के सभा प्रमुख धर्मगुरु, पीठाधीश्वर, महामंडलेश्वर, संत भगवताचार्य, समाज चिंतक, इतिहास के जानकार, कानूनविद् और पुरातत्वविद अंतरराष्ट्रीय धर्म संसद में भाग लेने मथुरा आ रहे हैं।
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स्वामी वामदेव के अंदाज में फिर से भरी जा सकती है हुंकार
राममंदिर निर्माण के आंदोलन में वृंदावन के स्वामी वामदेव का बड़ा रोल था। उन्होंने सन् 1984 में उस मुद्दे को तगड़ी धार दी थी। 1990 में कारसेवकों पर जब गोली चलाई गई तब भी उन्होंने आरपार की लड़ाई का एलान कर दिया था। पूरे देश से साधु-संतों की बैठक बुलाई गई थी। जयपुर में 15 दिनों तक साधु-संतों ने मंथन कर आंदोलन को धार दी थी। अब फिर से वही दौरा लौटाने की कवायद शुरू हो गई है।


 

आ गए हैं अवध बिहारी, अब आएंगे कृष्ण मुरारी
इस आंदोलन से समूचे उत्तर प्रदेश के साधु-संतों को जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है। देश-विदेश के साधु-संत तो आ ही रहे हैं पर पूर्वांचल के संतों से यह आह्वान किया गया है कि राम मंदिर की लड़ाई में मथुरा ने आगे बढ़कर साथ दिया था। अब मथुरा की लड़ाई में उन्हें भी साथ देना होगा। नारा दिया गया है...आ गए हैं अवध बिहारी, अब आएंगे कृष्ण मुरारी। सबसे अहम है कि इसके लिए ऐतिहासिक तथ्य जुटाए जा रहे हैं ताकि सभी को बताया जा सके कि यह लड़ाई भी समूचे हिंदुत्व की ही लड़ाई है।

संघ की बैठक में मुद्दा उठने से बढ़ी महत्ता
मथुरा में आरएसएस का दस दिवसीय शिविर आयोजित हुआ था, जिसमें संघ प्रमुख मोहन भागवत भी मौजूद रहे थे। उन्होंने आगे की सभी तैयारियों को परखा था। इसी दौरान श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुद्दे पर भी बात हुई। यहां तक कि संघ के सर कार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने कहा था कि हर बार अयोध्या आंदोलन का अंदाज अपनाने की आवश्यकता नहीं होती। माना जा रहा है कि उनका इशारा कारसेवा की तरफ था, लेकिन उन्होंने यह इशारा किया था कि संघ ही क्यों अगुवाई करे। स्थानीय लोग भी इसमें बढ़कर आगे आएं। उसके बाद से धर्म संसद की तैयारियों का अंदाज बदल गया और अब इसे बड़े स्तर पर एजेंडे के साथ आयोजित किया जा रहा है। पूरी योजना है कि धर्म संसद में इसके लिए आंदोलन का शंखनाद किया जाए।
 
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ये होंगे शामिल
एडवोकेट महेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि स्वामी उमेश योगी (यूरोप), स्वामी ब्रह्मानंद सरस्वती जी महाराज ( वॉशिंगटन डीसी-यूएसए), स्वामी स्वतमानंद ( यूएसए), दिलीप (यूएनओ यूएस), स्वामी अंतभोद (लिटवानिया यूरोप), स्वामी शंकरतिलक (स्पेन), गुरु रिकॉर्डम (बार्सिलोना स्पेन), पंडित विवेक दुबे (इटली), विवेक ओझा (चीजेच रिपब्लिक) के संत आ रहे हैं। स्पेन की मुख्य एक्ट्रेस सिल्वा डे लाय रोसा आदि धर्म संसद में पहुंचेंगे।
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