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Mathura News: रमजान माह अल्लाह की रहमतों का सबसे अच्छा अवसर

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कोसीकलां। मुकद्दस रमजान का तीसरा और अंतिम अशरा शुरू हो गया है। यह अशरा इबादत और मगफिरत का समय है।
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सरायशाही मस्जिद के मौलाना जर्रार हुसैन के अनुसार इस अशरे में दस दिन अल्लाह की रहमतों का सबसे अच्छा अवसर है। इसमें शब-ए-कद्र भी आएगी। मुकद्दस रमजान में दस-दस दिन के कुल तीन अशरे होते हैं। पहला अल्लाह की रहमतों का, दूसरा गुनाहों से मगफिरत का और तीसरा अशरा जहन्नुम की आग से निजात दिलाने वाला होता है।
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बुधवार को इक्कीसवें रोजे के साथ ही तीसरा और अंतिम अशरा शुरू हो गया है। उन्होंने कहा कि तीसरा अशरा 21वें रोजे की मगरिब से शुरू होता है और ईद का चांद नजर आने तक चलता है। इस अशरे में इबादत करने से जहन्नुम से आजादी मिलती है। तीसरे अशरे में रातों में एक शब-ए-कद्र भी आएगी जो किसी को नहीं मालूम इसलिए अंतिम अशरे की 21, 23, 25, 27 और 29वीं रात को रात भर जग कर इबादत की जाती है ताकि शब-ए-कद्र की रात मिल जाए। बताया कि एक शबे कद्र की रात को हजार महीने की रातों के बराबर बताया गया है। संवाद
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