मथुरा। सर्दी की अभी शुरुआत ही है, लेकिन नवजातों पर इसका गंभीर असर देखने को मिल रहा है। नवजातों में खांसी, जुकाम, बुखार और सांस संबंधित दिक्कतों के मामलों में तेजी से इजाफा हुआ है। महिला अस्पताल से लेकर निजी क्लीनिकों तक अभिभावकों की भीड़ बढ़ी हुई है। चिकित्सक अभिभावकों से नवजातों का विशेष ध्यान रखने की सलाह दे रहे हैं।
महिला अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. ओमप्रकाश ने बताया कि नवजातों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बहुत कमजोर होती है। ऐसे में पहली बार पड़ने वाली सर्दी उनके लिए अधिक संवेदनशील होती है। पिछले एक सप्ताह में नवजातों की ओपीडी में 30 से 40 प्रतिशत तक बढ़ोतरी दर्ज की गई है। ज्यादातर मामले अचानक तापमान गिरने और नवजातों को सही तरीके से गर्मी न मिल पाने के कारण बीमार होने के आ रहे हैं। कई शिशुओं में सांस फूलने और सीने में जमाव की शिकायत भी आ रही है। नवजातों में बढ़ती बीमारियों को देखते हुए अभिभावकों का सतर्क रहना बहुत जरूरी है। हल्की सी लापरवाही नवजातों की सेहत को भारी नुकसान पहुंचा सकती है।
उन्होंने बताया कि सर्दियों में नवजातों को सुबह 7 से 10 और शाम को चार बजे के बाद धूप में ले जाना सबसे अच्छा है। क्योंकि इस समय धूप सबसे फायदेमंद होती है। बच्चों को 15-20 मिनट के लिए धूप में लेकर जाएं। 30 मिनट से ज्यादा बच्चों को धूप में न रहने दें। बच्चे की त्वचा संवेदनशील होती है, इसलिए दोपहर की तेज धूप से बचें। बच्चों को छाती और पीठ पर धूप जरूर लगने दें। नवजात शिशु को सीधे धूप के संपर्क से बचाएं और उन्हें कपड़े पहनाकर हल्की धूप में बिठाएं। अगर आप बच्चों को नहला रहे हैं, तो सबसे अच्छा समय सुबह 11 बजे से दोपहर 12 बजे के बीच है।
चिकित्सकों ने बताए बचाव के उपाय
नवजातों को सीधे ठंडी हवा में न लेकर आएं।
कमरे का तापमान संतुलित रखें।
बच्चे को उतने ही कपड़े पहनाएं जितने जरूरी हों। ज्यादा कपड़े भी परेशानी बढ़ाते हैं।
सिर, कान और पैरों को ढककर रखें।
नियमित स्तनपान कराना बेहद महत्वपूर्ण है।
किसी भी तरह की सांस की समस्या या बुखार दिखे तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लें।