मथुरा-रिफाइनरी। आस्था के महापर्व छठ पूजा की शुरुआत शनिवार को नहाय-खाय के साथ होगी। रविवार को खरना के रूप में मनाया जाएगा। 28 अक्तूबर को उगते सूरज को अर्घ्य देने के साथ महापर्व का समापन होगा। शनिवार को नहाय-खाय के रूप में शुरुआत होगी। इस दिन व्रती महिलाएं एवं पुरुष शुद्धता के साथ बनाए गए भोजन को सूर्य भगवान को भोग लगाने के बाद ग्रहण करेंगी।
व्रती महिलाएं घी में बनी लौकी (कद्दू) की सब्जी, चने की दाल एवं अरवा चावल का भात बनाकर प्रसाद ग्रहण करेंग और इसी के साथ हीं 36 घंटे के निर्जला व्रत की शुरुआत हो जाएगी। 26 अक्तूबर को खरना (लोहड़) के रूप में मनाया जाएगा। इस दिन व्रती दिनभर निर्जला व्रत रखेंगे और शाम को गुड़ में बनी खीर (जाऊर) का भगवान सूर्य को भोग लगाकर प्रसाद ग्रहण करेंगे। महापर्व के तीसरे दिन 27 को सभी व्रती एवं श्रद्धालु यमुना किनारे जाकर पानी में खड़े होकर भगवान सूर्य की उपासना करेंगे और अस्ताचलगामी सूर्य को विभिन्न प्रकार के फलों, ठेकुआ, कचवनिया, ईख आदि से अर्घ्य देंगे।
इस अवसर पर महिलाएं नदी किनारे बैठकर छठी माता की गीत गाती हैं। चौथे दिन तड़के चार बजे से ही श्रद्धालुओं का घाटों पर जाना शुरू हो जाएगा। व्रती सूर्योदय से घंटों पहले से ही पानी में खड़े होकर भगवान सूर्य की आराधना करने लगते हैं। वे भगवान सूर्य के प्रति अपनी कृतज्ञता को प्रकट करते हैं और अपने परिवार की सुख-समृद्धि के साथ-साथ वैश्विक शांति की एवं सामाजिक भाईचारे की कामना करते हैं। उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ ही महापर्व का समापन हो जाएगा।पूर्वांचल समिति द्वारा अड्डा घाट (सिविल लाइन) की साफ-सफाई एवं लाइटिंग की व्यवस्था की जा रही है, ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की कोई असुविधा ना हो। इस अवसर पर प्रशासन द्वारा भी घाटों की साफ-सफाई कराई जा रही है।