वृंदावन। पंजाब के भटिंडा से आए 74 वर्षीय राजेंद्र और उनकी 72 वर्षीय पत्नी संतोष को उनके रिश्तेदारों ने वृंदावन में बेसहारा छोड़ दिया। करीब 15 दिन तक सड़क पर भटकने के बाद अपना घर आश्रम ने उन्हें आश्रय दिया है।
दंपती के पास संतान नहीं है। आरोप है कि उनके अपने ही रिश्तेदारों ने बुढ़ापे में मदद का झांसा दिया। वे उन्हें घर से लेकर आए और वृंदावन के अटल्ला चुंगी के पास छोड़ गए। कई दिनों तक दंपती भूख-प्यास और शारीरिक लाचारी के बीच सड़क किनारे तड़पते रहे। अपना घर आश्रम की टीम की नजर उन पर पड़ी। टीम उन्हें आश्रम ले आई। बुजुर्ग राजेंद्र ने कहा, जब अपनों ने पूरी तरह मुंह मोड़ लिया तब आश्रम ने उन्हें नया जीवन दिया। अगर आश्रम की टीम न आती तो शायद हम जिंदा न बचते। टीम ने भटिंडा में उनके घर की तलाश की, जहां पता चला कि उनका घर भी बिक चुका है। महिला संतोष के भाई एक प्रतिष्ठित सूचना प्रौद्योगिकी अधिकारी हैं।